
Rohini Sindhuri IAS: कर्नाटक हाईकोर्ट ने IAS अधिकारी रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ ₹7.5 करोड़ के बैग घोटाले में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। बता दें कि कोर्ट ने राज्य सरकार के बचाव को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि विभागीय क्लीन चिट आपराधिक जांच को रोक नहीं सकती है। अब इस मामले की गहन कानूनी जांच होगी, जिससे यह पता चलेगा कि आरोप कितने सही हैं। सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की चर्चा हमेशा रहती है, लेकिन जब मामला किसी वरिष्ठ अधिकारी तक पहुँचता है, तो संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। दरअसल हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने IAS रोहिणी सिंधुरी के मामले में कार्रवाई का रास्ता साफ किया।
क्या है मामला?
मामला 2021 में हुए एक प्रोजेक्ट से जुड़ा है। उस समय रोहिणी सिंधुरी मैसूर जिले की डिप्टी कमिश्नर (DC) थीं। आरोप है कि मैसूर जिले में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए खरीदे गए ईको-फ्रेंडली बैग्स की खरीद में अनियमितता हुई। याचिकाकर्ता एनआर रविचंद्रे गौड़ा, जो वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, ने आरोप लगाया कि मार्केट में ₹13 के मिलने वाले बैग्स को KHDC से ₹52 प्रति बैग की दर पर खरीदा गया। इस वजह से सरकारी खजाने को लगभग ₹7.5 करोड़ का नुकसान हुआ। इस भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर शिकायत एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) में दर्ज कराई गई थी।
कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह IAS रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे। जिसमें कोर्ट का कहना है कि अब इस मामले को और लंबा खींचने का कोई मतलब नहीं है। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने अपने आदेश में कहा कि पहले ही कोर्ट सरकार को दोबारा विचार करने के निर्देश दे चुका था, लेकिन सरकार ने पुराने फैसले को केवल थोड़े बदलाव के साथ दोहराया, जो न्याय के हित में सही नहीं है।
कोर्ट को क्यों दखल देना पड़ा?
याचिकाकर्ता ने पहले एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 2022 में राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत कार्रवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस इनकार के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट पहुंची। कोर्ट ने 2025 में सरकार को मामले पर दोबारा विचार करने को कहा। लेकिन मई 2025 तक भी सरकार ने अनुमति नहीं दी। अंततः हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और सीधे अभियोजन की मंजूरी देने का आदेश जारी किया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार के आरोप के समर्थन में सामग्री मौजूद है, तो इसे शुरुआत में ही खत्म नहीं किया जा सकता। जज ने स्पष्ट किया कि सत्य सामने लाने के लिए जांच जरूरी है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई अलग-अलग होती हैं। यानी किसी अधिकारी को विभागीय जांच में क्लीन चिट मिलना यह साबित नहीं करता कि उस पर आपराधिक केस नहीं चल सकता।
कौन हैं रोहिणी सिंधुरी?
रोहिणी सिंधुरी कर्नाटक कैडर की 2009 बैच की सीनियर IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 30 मई 1984 को हुआ था। उन्होंने हैदराबाद की JNTU यूनिवर्सिटी से B.Tech. की डिग्री हासिल की।उनका करियर तेज और विवादों से भरा रहा है। रोहिणी सिंधुरी ने मैसूर की DC और कर्नाटक हैंडलूम डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की MD जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
जानकारी के अनुसार, उनका काम करने का तरीका सख्त और निर्णायक है। इस कारण वह अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। उनके फैसले कभी-कभी विवादों का कारण भी बनते रहे हैं।
बैकग्राउंड बैग घोटाले का विस्तार
घोटाले का मामला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट के तहत पर्यावरण के अनुकूल बैग खरीदे गए थे। आरोप है कि इन बैग्स की कीमत को अधिक दिखाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाया गया। जिसमें याचिकाकर्ता एनआर रविचंद्रे गौड़ा ने कहा कि बैग्स का मार्केट प्राइस ₹13 था, जबकि KHDC ने ₹52 प्रति बैग पर खरीदे। कुल मिलाकर लगभग ₹7.5 करोड़ का सरकारी धन प्रभावित हुआ। दरअसल यह मामला भ्रष्टाचार और सरकारी धन के अनुचित उपयोग को लेकर देश में जागरूकता का एक उदाहरण बन गया।
अब आगे क्या होगा?
कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, राज्य सरकार को IAS अधिकारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देनी होगी। इसके बाद जांच एजेंसियां मामले की गहन जांच करेंगी। जांच में यह पता चलेगा कि आरोप कितने सही हैं और सरकारी धन का वास्तविक नुकसान कितना हुआ। यदि आरोप साबित होते हैं, तो रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
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