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37 सीटों पर राज्यसभा चुनाव, बिहार से महाराष्ट्र तक NDA के सहयोगियों में बढ़ी खींचतान, BJP के लिए चुनौती
Current image: Rajya Sabha Election 2026

Rajya Sabha Election 2026: राज्यसभा के 37 सीटों पर आगामी चुनाव 16 मार्च 2026 को होंगे। जिसमें इस बार चुनाव की चर्चा सिर्फ सत्ता और विपक्ष के बीच नहीं होगी, बल्कि NDA के सहयोगियों के भीतर संतुलन बनाए रखने पर भी केंद्रित है। बताया जा रहा है कि विपक्ष के साथ मुकाबले के अलावा यह चुनाव गठबंधन की आपसी ताकत और रणनीति की भी परीक्षा होगी।

बिहार NDA के लिए सबसे कठिन स्थिति

जानकारी के लिए बता दें कि बिहार में इस बार पांच सीटों पर चुनाव होना है। NDA के पास 202 विधायक हैं, जबकि पांचों सीटें जीतने के लिए 205 वोटों की जरूरत है। इसका मतलब है कि NDA को सिर्फ तीन अतिरिक्त वोट चाहिए। जिससे एक सीट जीतने के लिए 41 वोट बहुत जरूरी हैं। वहीं, महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, और अगर AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक उनका समर्थन कर दें, तो विपक्ष एक सीट जीत सकता है।

जिसमें NDA के भीतर सीटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है। साथ ही, दो सीटें BJP दो जेडीयू और एक सीट किसी सहयोगी दल को दी जाएगी। लेकिन सहयोगी दल कौन होगा, यह अभी तक तय नहीं हुआ है। जिसके वजह से चर्चा है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस सीट पर आगे है और चिराग पासवान अपनी मां को राज्यसभा भेज सकते हैं। इसके अलावा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी दावेदारी में हैं।

महाराष्ट्र गठबंधन में संतुलन का सवाल

दरअसल, महाराष्ट्र में कुल सात सीटें खाली हो रही हैं। जिसमें यहां एक सीट जीतने के लिए 37 वोट जरूरी हैं। सत्ताधारी महायुति के पास 235 विधायक हैं, जिससे छह सीटें आसानी से जीतने की स्थिति है। लेकिन शिवसेना (शिंदे गुट) दो सीटों की मांग कर रही है। बीजेपी तीन सीटें अपने पास रखकर एक सीट आरपीआई (अठावले गुट) को दे सकती है। अगर शरद पवार निर्दलीय उम्मीदवार बनकर मैदान में आते हैं, तो क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बनी रहती है।

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल दक्षिण का समीकरण

तमिलनाडु में छह सीटों का चुनाव है। जिससे वर्तमान विधानसभा गणित के अनुसार डीएमके चार सीटें आसानी से जीत सकता है, एआईएडीएमके अपनी एक सीट बचा सकता है और एक सीट पर मुकाबला संभव है। वहीं, पश्चिम बंगाल में पांच सीटों में से चार तृणमूल कांग्रेस और एक सीट सीपीआई (एम) के पास है। तृणमूल कांग्रेस अपनी चार सीटें बचाने की स्थिति में है, जबकि सीपीआई (एम) की एक सीट पर खतरा मंडरा रहा है।

ओडिशा, असम और अन्य राज्यों में मुकाबला

ओडिशा में चार सीटों में दो बीजेपी और दो बीजेडी के पास हैं। मौजूदा समीकरणों के अनुसार बीजेपी तीन सीटें जीत सकती है और बीजेडी को एक सीट मिल सकती है। असम में तीन सीटों में से दो बीजेपी और एक एजीपी के पास हैं, लेकिन कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन तीसरी सीट पर चुनौती पेश कर सकता है।

उत्तर और मध्य भारत में भी कई दिलचस्प बदलाव संभव हैं। हरियाणा में दो सीटों में से एक बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में जा सकती है। छत्तीसगढ़ में दोनों सीटें कांग्रेस के पास हैं, लेकिन इस बार दोनों दलों को एक-एक सीट मिल सकती है। तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस को कुछ सीटों पर बढ़त मिलने की संभावना है।

NDAको मिलेगा फायदा, लेकिन सहयोगियों को संतुलित करना जरूरी

बता दें कि, लगभग इस चुनाव में NDA को 2-3 सीटों का फायदा मिल सकता है, जबकि इंडिया ब्लॉक को 3-4 सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 तक पहुंच सकती हैं, जबकि कांग्रेस की सीटें 4 से 5 हो सकती हैं। आरजेडी, एनसीपी, शिंदे शिवसेना और आरएलएम जैसे क्षेत्रीय दलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, इस बार राज्यसभा का चुनाव केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत की असली परीक्षा बन गया है। अगर बीजेपी अपने सहयोगियों की महत्वाकांक्षाओं को संतुलित कर लेती है, तो राज्यसभा में उसकी बढ़त लगभग तय है। लेकिन सहयोगियों के बीच खींचतान बढ़ी, तो यह चुनाव विपक्ष से पहले एनडीए की एकजुटता की परीक्षा बन जाएगा। यही कारण है कि इस बार असली लड़ाई अंदर की है, जो तय करेगी कि राज्यसभा में किसकी पकड़ मजबूत होगी।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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