
भारतीय खेल जगत से एक दुखद और भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है. इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पीटी ऊषा के पति वी.श्रीनिवासन का 30 जनवरी, शुक्रवार सुबह निधन हो गया. वे 67 वर्ष के थे. इस दुखद घटना के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है. खेल जगत, राजनीति और समाज के विभिन्न वर्गों से पीटी ऊषा के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं.
घर पर अचानक बिगड़ी श्रीनिवासन की तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह वी. श्रीनिवासन अपने घर पर ही अचानक बेहोश हो गए. परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत बेहद गंभीर थी और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी तबीयत काफी बिगड़ चुकी थी.
इस अचानक हुए निधन से न सिर्फ पीटी ऊषा का परिवार, बल्कि उन्हें जानने वाले सभी लोग स्तब्ध हैं.
प्रधानमंत्री ने फोन कर जताया शोक
इस दुखद समाचार के सामने आने के बाद नरेंद्र मोदी ने स्वयं पीटी ऊषा को फोन कर उनके पति के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में पीटी ऊषा और उनके परिवार को धैर्य और शक्ति प्रदान करने की कामना की. सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा, कि यह केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए दुखद है जो पीटी ऊषा के जीवन और संघर्ष से जुड़े रहे हैं.
कौन थे वी. श्रीनिवासन?
वी. श्रीनिवासन एक सादगीपूर्ण और निजी जीवन जीने वाले व्यक्ति थे. वे केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी रह चुके थे. हालांकि वे हमेशा लाइमलाइट से दूर रहे, लेकिन पीटी ऊषा के जीवन और करियर में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है.
करीबी लोगों के अनुसार, श्रीनिवासन न सिर्फ एक जीवनसाथी थे, बल्कि पीटी ऊषा के लिए सबसे मजबूत सहारा और मार्गदर्शक भी थे. खेल जगत में पीटी ऊषा की ऐतिहासिक उपलब्धियों से लेकर राजनीति में उनके कदम रखने तक, हर अहम मोड़ पर श्रीनिवासन ने उनका साथ दिया और मजबूती से उनके साथ खड़े रहे.
पीटी ऊषा के करियर के पीछे अदृश्य शक्ति
पीटी ऊषा को भारत की सबसे महान एथलीट्स में गिना जाता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली ऊषा के पीछे वी. श्रीनिवासन की प्रेरणा और समर्थन को अक्सर उनके करीबी लोग याद करते हैं.
जब पीटी ऊषा ने खेल से संन्यास के बाद नए रास्ते चुने, खेल प्रशासन में कदम रखा और बाद में राजनीति में आईं, तब भी उनके पति श्रीनिवासन ने उन्हें हर निर्णय में पूरा सहयोग दिया. उन्हें पीटी ऊषा की कई बड़ी प्रोफेशनल उपलब्धियों के पीछे एक “शांत शक्ति” के रूप में देखा जाता था.
खेल जगत और IOA में शोक की लहर
पीटी ऊषा वर्तमान में Indian Olympic Association की अध्यक्ष हैं. उनके पति के निधन की खबर के बाद इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA )से जुड़े कई पदाधिकारियों, खिलाड़ियों और खेल से जुड़े संगठनों ने दुख जताते हुए शोक संदेश दिया.
कई पूर्व और वर्तमान खिलाड़ियों ने कहा कि श्रीनिवासन हमेशा पर्दे के पीछे रहकर भारतीय खेलों के लिए काम करने वालों का मनोबल बढ़ाते थे.
खेल संगठनों ने इस नुकसान को “खेल परिवार की निजी क्षति” बताया है.
राजनीतिक जगत से भी आई संवेदनाएं
पीटी ऊषा वर्त्तमान में राज्यसभा सांसद भी हैं. उनके पति के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया.
कई सांसदों और नेताओं ने कहा कि यह एक ऐसी क्षति है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है.
सोशल मीडिया पर भी नेताओं, खिलाड़ियों और आम लोगों ने पीटी ऊषा के लिए संवेदना संदेश साझा किए हैं.
सोशल मीडिया पर उमड़ा शोक
जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर #PTUsha ट्रेंड करने लगा. लोगों ने पीटी ऊषा के संघर्ष, उपलब्धियों और उनके पारिवारिक जीवन को याद करते हुए संवेदनाएं व्यक्त कीं.
वहीं, कई यूज़र्स ने लिखा कि “हर सफल महिला के पीछे एक मजबूत साथी होता है”, और श्रीनिवासन उसी का एक उदाहरण थे.
परिवार के लिए कठिन समय
वी. श्रीनिवासन का निधन पीटी ऊषा और उनके परिवार के लिए एक गहरा व्यक्तिगत आघात है. करीबी सूत्रों के अनुसार परिवार इस समय बेहद दुखी है और अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं. वहीं,देशभर के लोग पीटी ऊषा को इस दुख की घड़ी में हिम्मत मिलने की दुआ कर रहे हैं.
एक सादगीभरा लेकिन प्रेरणादायक जीवन
वी. श्रीनिवासन भले ही सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देते थे, लेकिन उनका जीवन समर्पण, समर्थन और प्रेरणा का प्रतीक था. उन्होंने कभी खुद को आगे नहीं रखा, बल्कि हमेशा पीटी ऊषा की सफलता को प्राथमिकता दी. उनका जाना एक परिवार, एक खिलाड़ी और एक संस्था के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है. वी. श्रीनिवासन का जीवन हमे यह सिखाता है कि किसी की सफलता के पीछे खड़े रहकर सहयोग देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने बिना किसी पहचान की चाह के पीटी ऊषा के सपनों को पूरा करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया.
आज उनका जाना न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक भावनात्मक क्षण बन गया है.






