
Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। दरअसल, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक हरिनारायण सिंह के एक बयान ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। जिसमें उन्होंने दावा किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में निशांत कुमार को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
बता दें कि इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अभी तक JDU या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हरिनारायण सिंह के दावे ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है।
8 मार्च को JDU की सदस्यता लेने का दावा
जानकारी के लिए बता दें कि हरनौत से कई बार विधायक रह चुके जेडीयू नेता हरिनारायण सिंह ने कहा कि निशांत कुमार 8 मार्च को जनता दल यूनाइटेड की प्राथमिक सदस्यता ले सकते हैं। जिसमें यह निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में प्रवेश का पहला कदम होगा। साथ ही, पार्टी के अंदर इस बारे में चर्चा पहले ही हो चुकी है और कई नेताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन भी किया है। अगर ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
पार्टी बैठक में हुई चर्चा
हरिनारायण सिंह के मुताबिक, हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। वहीं, इस बैठक में पार्टी के कई विधायक और सांसद मौजूद थे। बैठक में निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा की गई। जिसमें उन्होंने दावा किया कि इस प्रस्ताव को लेकर पार्टी के अंदर सकारात्मक माहौल है और कई नेता चाहते हैं कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आएं। हालांकि इस बैठक के बारे में अभी तक कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है।
एमएलसी बनकर मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
दरअसल, JDU विधायक ने यह भी कहा कि निशांत कुमार को बिहार विधान परिषद के जरिए एमएलसी बनाया जा सकता है। इसके लिए अप्रैल में होने वाले एमएलसी चुनाव का रास्ता अपनाया जा सकता है। जिसमें उनका कहना है कि अगर निशांत कुमार एमएलसी बनते हैं तो उसके बाद उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भविष्य में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
10 अप्रैल के बाद इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश कुमार
हरिनारायण सिंह ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि यह सिर्फ उनका दावा है और इस बारे में पार्टी या मुख्यमंत्री की तरफ से कोई पुष्टि नहीं हुई है। अब अगर ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
अब तक राजनीति से दूर रहे हैं निशांत कुमार
निशांत कुमार अब तक राजनीति से दूरी बनाए हुए थे। वह आमतौर पर सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों में कम ही नजर आते हैं। बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के बेटे होने के बावजूद उन्होंने राजनीति में सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं निभाई है। इसी वजह से जब उनके राजनीति में आने की चर्चा सामने आई तो यह खबर तेजी से फैल गई और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी बहस शुरू हो गई।
परिवारवाद पर भी हो सकती है बहस
बता दें कि निशांत कुमार राजनीति में प्रवेश करते हैं तो यह मुद्दा बिहार की राजनीति में परिवारवाद की बहस को भी तेज कर सकता है। जिसमें भारत की राजनीति में कई बड़े नेताओं के बच्चे राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि नीतीश कुमार को अब तक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता रहा है जिन्होंने परिवार को राजनीति से दूर रखा। ऐसे में अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो यह उनकी छवि में बदलाव के रूप में भी देखा जा सकता है।
विपक्ष ने साधी चुप्पी
दरअसल, इस पूरे मामले पर अभी तक विपक्ष की ओर से भी कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक पार्टी नेतृत्व या खुद निशांत कुमार इस विषय पर कुछ नहीं कहते, तब तक इन दावों को सिर्फ राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जाएगा।
पार्टी की ओर से नहीं आई पुष्टि
बता दें कि जेडीयू के किसी बड़े नेता या पार्टी नेतृत्व ने अभी तक हरिनारायण सिंह के दावे की पुष्टि नहीं की है। इसलिए यह साफ नहीं है कि निशांत कुमार वास्तव में राजनीति में आने वाले हैं या नहीं।लेकिन इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इस विषय पर और भी स्पष्टता सामने आ सकती है।
आने वाले समय में साफ होगी तस्वीर
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निशांत कुमार कल 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता लेते हैं तो यह साफ संकेत होगा कि वह राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जेडीयू नेतृत्व या खुद निशांत कुमार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। जिसमें एक बात जरूर है कि इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गर्म हो सकता है।
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