
दुनिया भर में कोविड-19 महामारी की यादें अभी भी लोगों के मन में ताजा हैं. ऐसे में किसी नए या अनोखा वायरस की खबर आते ही लोगों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. इसी बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने गुरुवार को भारत में निपाह वायरस के दो मामलों की पुष्टि की. यह जानकारी सामने आने के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे,क्या फिर से कोई बड़ी महामारी आने वाली है? क्या यात्रा और व्यापार पर असर परने वाला है?
हालांकि,वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने स्थिति को लेकर राहत देने वाला बयान दिया है. संगठन ने साफ कहा है कि दिसंबर 2025 के बाद से भारत में केवल दो ही मामले सामने आए हैं और मौजूदा हालात में देश से वायरस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा कम है. इसलिए भारत के लिए किसी भी तरह के यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की जरूरत नहीं है.
WHO का बयान क्यों माना जाता अहम?
WHO का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एशिया के कई देशों जैसे हांगकांग, थाईलैंड, ताइवान, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम और नेपाल में निपाह वायरस के मामले सामने आने के बाद कोविड-19 जैसी स्वास्थ्य जांच व्यवस्थाएं दोबारा सख्त की जा रही हैं. कई देशों ने एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग बढ़ा दी है और संदिग्ध मरीजों की निगरानी शुरू कर दी गई है. वहीं, भारत के संदर्भ में WHO ने यह स्पष्ट किया है कि यहां स्थिति नियंत्रण में है. स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं और निगरानी प्रणाली काम कर रही है. यही वजह है कि फिलहाल किसी तरह की घबराहट या कड़े प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं समझी गई.
क्या है निपाह वायरस?
निपाह वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक वायरस है. यह वायरस इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकता है. इसकी पहचान सबसे पहले मलेशिया के एक गांव “निपाह” में हुई थी, और उसी के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया.यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों, जिन्हें “फ्लाइंग फॉक्स” भी कहा जाता है, से फैलता है. ये चमगादड़ कई बार फलों या ताड़ी जैसे पेय पदार्थों को संक्रमित कर देते हैं. अगर इंसान ऐसे दूषित फल या पेय का सेवन कर ले, तो संक्रमण फैलने की संभावना हो सकती है.
कैसे फैलता है निपाह वायरस?
निपाह वायरस के फैलने के तीन प्रमुख रास्ते माने जाते हैं:
- चमगादड़ से इंसान में – संक्रमित चमगादड़ के संपर्क में आने या उनके द्वारा खाए गए फलों के जरिए.
- जानवरों से इंसान में – खासकर सूअर जैसे जानवरों के संपर्क से.
- इंसान से इंसान में – संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ, जैसे लार या सांस की बूंदों के संपर्क से.
इसी वजह से अस्पतालों और घरों में संक्रमित मरीजों की देखभाल करते समय खास सावधानी बरतने की जरूरी होती है.
कितनी खतरनाक है यह बीमारी?
निपाह वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में गिना जाता है. इसकी मृत्यु दर 40 प्रतिशत से लेकर 75 प्रतिशत तक बताई जाती है. यानी अगर 100 लोग संक्रमित होते हैं, तो उनमें से 40 से 75 लोगों की जान जा सकती है. आंकड़े बताते हैं कि इस वायरस से संक्रमित होने वाले आधे से ज्यादा मरीजों की मौत हो जाती है. यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बेहद गंभीर बीमारी मानते हैं.
निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं?
निपाह वायरस के लक्षण आम बुखार से लेकर गंभीर दिमागी संक्रमण तक हो सकते हैं. इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, जिससे पहचान में देरी हो सकती है. इसके मुख्य लक्षण हैं तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी और जी मिचलाना, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ. वहीं ऐसे,गंभीर मामलों में मरीज को दिमागी सूजन (एन्सेफलाइटिस) हो सकती है, जिससे बेहोशी, दौरे और कोमा तक की स्थिति बन सकती है.
भारत में निपाह वायरस का क्या है इतिहास?
भारत में निपाह वायरस का पहला मामला साल 2001 में सामने आया था. इसके बाद अलग-अलग समय पर इसके छोटे-बड़े प्रकोप देखे गए हैं. खासतौर पर केरल में पिछले कुछ वर्षों में निपाह के मामले सामने आए, जिन पर तेजी से नियंत्रण किया गया. सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों ने समय रहते सख्त कदम उठाकर बड़े प्रकोप को रोकने में सफलता पाई. यही कारण है कि भारत में अब तक निपाह वायरस बड़े पैमाने पर नहीं फैला.
मौजूदा दो मामलों पर क्या कहता है WHO?
WHO के अनुसार, दिसंबर 2025 के बाद से भारत में केवल दो मामले सामने आए हैं. इन मामलों की पहचान होते ही स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों को आइसोलेट कर दिया और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू कर दी गई. WHO का मानना है कि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था निपाह जैसे संक्रमण से निपटने में सक्षम है. वायरस के सीमित मामलों को देखते हुए फिलहाल किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय चिंता की स्थिति नहीं है.
वैक्सीन और इलाज की स्थिति
फिलहाल निपाह वायरस की कोई पुख्ता वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इलाज मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें मरीज को सपोर्टिव केयर दी जाती है. यही वजह है कि समय पर पहचान और आइसोलेशन सबसे बड़ा हथियार है.






