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National Girl Child Day: ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से सशक्त भारत की नींव
Current image: राष्ट्रीय बालिका दिवस

हर साल 24 जनवरी को National Girl Child Day यानी राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है.यह दिन समाज को यह याद दिलाने के लिए है ,कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं और उन्हें समान अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए.यह सिर्फ एक दिवस नहीं, बल्कि सोच बदलने और समाज को जागरूक करने का अभियान है.

भारत जैसे देश में जहां आज भी कई जगहों पर बालिकाओं को भेदभाव, असमानता और सामाजिक बंधनों का सामना करना पड़ता है, वहां यह दिन एक सकारात्मक संदेश और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुका है.

राष्ट्रीय बालिका दिवस का शेष उद्देश्य क्या है ?

National Girl Child Day मनाने का मुख्य उद्देश्य है बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना,पक्षपातपूर्ण भेदभाव को खत्म करना,बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना,बाल विवाह और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाना और बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना।

यह दिन समाज को यह समझाने का प्रयास करता है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है.

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत

बालिकाओं के संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरुआत की.इस योजना का मुख्य उद्देश्य था घटते लिंग अनुपात को सुधारना,बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना,और समाज में बेटियों के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना।

इस अभियान ने धीरे-धीरे पूरे देश में एक जन आंदोलन का रूप ले लिया.

शिक्षा बनी सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी

किसी भी समाज को आगे बढ़ाने के लिए बालिका शिक्षा सबसे मजबूत आधार है.पढ़ी-लिखी बेटी एक परिवार को शिक्षित करती है,समाज को जागरूक बनाती है,आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती हैऔर अगली पीढ़ी को बेहतर संस्कार देती है.

National Girl Child Day हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर बेटियां पढ़ेंगी, तभी देश आगे बढ़ेगा.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: क्यों है जरूरी?

आज भी भारत के कई हिस्सों में बालिकाओं की पढ़ाई बीच में छुड़ा दी जाती है,उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रखा जाता है और कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाती है. ऐसे में यह योजना बेटियों को यह अधिकार दिलाने की कोशिश करती है कि वे पढ़ें,अपने सपनों को पूरा करें,आत्मनिर्भर बनें और समाज में एक बराबरी का स्थान पाएं.

आज की बेटियां, हर क्षेत्र में आगे दिख रही है. वे विज्ञान और तकनीक में नाम रोशन कर रही हैं,खेलों में देश का गौरव बढ़ा रही हैं,राजनीति, प्रशासन और सेना में नेतृत्व कर रही हैं,और उद्यमिता और स्टार्टअप्स में आगे बढ़ रही हैं

यह साबित करता है कि मौका मिलने पर बेटियां हर चुनौती को अवसर में बदल सकती हैं.

हालांकि ,बेटियों के सशक्तिकरण में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं माता-पिता,शिक्षक,समाज और समुदाय.जब परिवार बेटी को आगे बढ़ने का अवसर देता है, तभी वह आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा कर पाती है.

राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें क्या संदेश देता है?

राष्ट्रीय बालिका दिवस हमें यह संदेश देता है कि बेटियों को बचाना ही नहीं, उन्हें आगे बढ़ाना भी जरूरी है,शिक्षा और सम्मान से ही सशक्तिकरण संभव है और समानता सिर्फ कानून से नहीं, हमारी सोच से आती है.

बालिकाओं के सशक्त भविष्य के लिए जरूरी है किउन्हें सुरक्षित वातावरण मिले,शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा मिले,शोषण और हिंसा से संरक्षण मिले.इसके लिए कानून तो हैं, लेकिन जागरूकता और संवेदनशीलता सबसे जरूरी है.

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