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Iranian supreme leader: ईरान को मिला नया supreme leader,खामेनेई के बेटे मोजतबा बने ईरान के सर्वोच्च नेता,असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का बड़ा फैसला
Current image: Who is Mojtaba Khamenei?

Mojtaba Khamenei: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के माहौल के बीच ईरान से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है. लंबे समय से चल रही अटकलों के बाद अब ईरान को नया सर्वोच्च नेता मिल गया है. ईरान की शक्तिशाली संस्था Assembly of Experts ने Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना है.
मोजतबा खामेनेई, पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बड़े बेटे हैं. उनके नाम की घोषणा ईरानी सरकारी टीवी पर सोमवार सुबह की गई.

अली खामेनेई की मौत के बाद बना नया नेतृत्व

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को मौत हो गई थी. रिपोर्टों के अनुसार तेहरान में हुए हमले के दौरान उनकी मृत्यु हुई, जिसके बाद ईरान में नए सुप्रीम लीडर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं. पूरी दुनिया की नजर इस बात पर थी कि अब ईरान का नेतृत्व कौन संभालेगा. कई बैठकों और विचार-विमर्श के बाद आखिरकार मोजतबा खामेनेई के नाम पर सहमति बनी.

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने किया ऐलान

ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है. यह संस्था 88 मौलवियों का समूह है, जिसका काम देश के सर्वोच्च नेता का चयन करना होता है. असेंबली ने एक बयान जारी कर कहा कि मजबूत समर्थन के साथ मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. साथ ही ईरानी जनता से अपील की गई है कि वे नए नेता के पीछे एकजुट रहें.

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

मोजतबा खामेनेई की उम्र करीब 56 साल बताई जा रही है. वह लंबे समय से ईरान की धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. हालांकि उन्होंने कभी औपचारिक रूप से कोई बड़ा सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन माना जाता है कि वह ईरान की सत्ता के अंदरूनी ढांचे में काफी प्रभावशाली रहे हैं.
वहीं,कई विश्लेषकों का मानना है कि वह वर्षों से अपने पिता के करीबी सलाहकारों में शामिल रहे.

रिपोर्टों के अनुसार मोजतबा खामेनेई को ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps का समर्थन प्राप्त है. ईरान की राजनीति और सुरक्षा ढांचे में इस संगठन की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसी समर्थन के कारण उनका सुप्रीम लीडर बनना आसान हुआ.

ईरान की सत्ता व्यवस्था में सुप्रीम लीडर की भूमिका

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है. देश के राष्ट्रपति और संसद के ऊपर भी सुप्रीम लीडर का प्रभाव होता है. सेना, न्यायपालिका, विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों में सुप्रीम लीडर की अंतिम भूमिका होती है. यही कारण है कि इस पद पर कौन बैठता है, इसका असर केवल ईरान की राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिति पर पड़ता है.

धार्मिक पद को लेकर उठे सवाल

हालांकि मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद कुछ विश्लेषकों ने सवाल भी उठाए हैं. दरअसल, ईरान में सर्वोच्च नेता बनने के लिए उच्च धार्मिक पद का होना परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. मोजतबा को अभी तक बड़े धार्मिक विद्वानों की श्रेणी में नहीं गिना जाता.इसके बावजूद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उन्हें सर्वोच्च नेता चुन लिया.

1979 की क्रांति के बाद तीसरे सुप्रीम लीडर

ईरान के इतिहास में यह तीसरी बार है जब नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार Ruhollah Khomeini ईरान के सुप्रीम लीडर बने थे. 1989 में उनके निधन के बाद अली खामेनेई ने यह पद संभाला. अब 2026 में मोजतबा खामेनेई इस पद को संभालने वाले तीसरे नेता बन गए हैं.

मोजतबा खामेनेई को ऐसे समय में सुप्रीम लीडर बनाया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के संघर्षों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है. ऐसे में नए नेता के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी.

इजरायल की धमकियों के बीच ऐलान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजरायल ने ईरान के नए नेतृत्व को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इजरायल ने नए सुप्रीम लीडर को भी निशाना बनाने की धमकी दी है. हालांकि इस पर ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की राजनीति और विदेश नीति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. हालांकि यह भी संभव है कि वह अपने पिता की नीतियों को ही आगे बढ़ाएं.

जनता से एकजुट रहने की अपील

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अपने बयान में ईरानी जनता से अपील की है कि वे देश की एकता बनाए रखें. बयान में कहा गया कि कठिन समय में राष्ट्र को मजबूत नेतृत्व और एकजुटता की जरूरत है.

ईरान के नए सुप्रीम लीडर का चयन सिर्फ देश की राजनीति तक सीमित नहीं है. इसका असर वैश्विक राजनीति और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है, क्यूंकि ईरान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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Author

  • Sakshi Raj

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