
Assam Assembly Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा रहा है. इसी बीच All India Trinamool Congress (TMC) ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है.पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee के नेतृत्व में TMC ने असम में अपनी पहली उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इस सूची में कुल 17 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं.
असम में TMC की औपचारिक एंट्री
TMC लंबे समय से पूर्वोत्तर भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। असम में उम्मीदवारों की घोषणा को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. पार्टी ने विभिन्न जिलों और आरक्षित सीटों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि TMC केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं बल्कि गंभीर चुनावी चुनौती देने के इरादे से मैदान में उतरी है.
किन सीटों पर उतारे गए उम्मीदवार?
TMC ने असम के अलग-अलग जिलों से उम्मीदवारों को मौका दिया है. प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- कोकराझार (बाओखुंगरी): उदंगस्री नरजरारी
- धुबरी (बिलासीपारा): मोमिननुर इस्लाम
- गोलपारा (जलेस्वर): आरिफ अख्तर अहमद
- बोंगईगांव (अभयापुरी): कौशिक रंजन दास
- बजाली (बजाली): कल्याणी कलिता
इसके अलावा:
- कामरूप (चमरिया): दुलु अहमद
- कामरूप (बोको-चायगांव ST): भोगलाल राभा
- नलबाड़ी (बारखेत्री): अमीरुल इस्लाम
- तमुलपुर (गोरेस्वर ST): राजन चौहान
- दररांग (मंगलदाई): हरे कृष्णा डेका
इन नामों से यह साफ होता है कि पार्टी ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की है.
चुनाव की तारीख और अहम जानकारी
असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए:
- मतदान: 9 अप्रैल 2026
- मतगणना: 4 मई 2026
- विधानसभा कार्यकाल समाप्त: 20 मई 2026
यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.
पिछला चुनाव और मौजूदा स्थिति
2021 के विधानसभा चुनाव में National Democratic Alliance (NDA) ने 126 में से 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. वर्तमान में Himanta Biswa Sarma राज्य के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के नेतृत्व में सरकार चल रही है.
TMC की रणनीति क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, TMC की रणनीति बहुआयामी है. भाजपा के खिलाफ विपक्षी वोटों को एकजुट करना, अल्पसंख्यक और क्षेत्रीय वोट बैंक पर ध्यान और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना. ममता बनर्जी पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को चुनौती देने की कोशिश करती रही हैं और असम में एंट्री उसी का हिस्सा मानी जा रही है.
क्या TMC बन सकती है ‘किंगमेकर’?
हालांकि TMC पहली बार असम चुनाव में इतनी सक्रिय नजर आ रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पार्टी सीधे सत्ता तक पहुंच पाएगी या ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाएगी? जैसे, सीमित सीटों पर चुनाव लड़ना, रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस और गठबंधन की संभावनाएं. इन सभी बातों को देखते हुए TMC चुनावी समीकरण बदल सकती है.
विपक्षी राजनीति पर असर
TMC की एंट्री से विपक्षी राजनीति पर भी असर पड़ सकता है. जैसे, कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध, विपक्षी वोटों का बंटवारा और नए राजनीतिक समीकरण. यह स्थिति भाजपा के लिए फायदे या नुकसान दोनों की वजह बन सकती है.
स्थानीय मुद्दों पर फोकस
TMC असम में स्थानीय मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रही है जैसे रोजगार, बाढ़ और बुनियादी ढांचा,शिक्षा और स्वास्थ्य. इन मुद्दों के जरिए पार्टी जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है.
जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने की चुनौती
असम जैसे राज्य में चुनाव जीतने के लिए केवल बड़े नेताओं की मौजूदगी काफी नहीं होती, बल्कि जमीनी संगठन भी उतना ही मजबूत होना जरूरी है. All India Trinamool Congress के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह कम समय में अपने कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार करे.
ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पकड़ अभी सीमित मानी जा रही है. ऐसे में बूथ स्तर तक संगठन बनाना, स्थानीय नेताओं को जोड़ना और जनता के बीच भरोसा बनाना TMC के लिए जरूरी होगा.
क्या ममता का ‘बंगाल मॉडल’ काम करेगा?
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में लगातार जीत हासिल की है. अब सवाल यह है कि क्या वही रणनीति असम में भी काम करेगी? जैसे क्षेत्रीय राजनीति की समझ, मजबूत नेतृत्व और जमीनी स्तर पर संगठन. इन सभी पहलुओं पर पार्टी को काम करना होगा.
TMC के कार्यकर्ताओं में इस घोषणा के बाद उत्साह देखने को मिल रहा है. रैलियों की तैयारी, प्रचार अभियान तेज और सोशल मीडिया पर सक्रियता यह संकेत देता है कि पार्टी इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है.
अब असम चुनाव में मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है. क्या TMC बड़ा उलटफेर करेगी? क्या भाजपा अपनी सत्ता बरकरार रखेगी? क्या विपक्ष एकजुट हो पाएगा? इन सवालों के जवाब चुनाव परिणाम के बाद ही मिलेंगे.
इस बार के चुनाव में युवाओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है. TMC अपनी रणनीति में युवाओं को खास तौर पर टारगेट कर रही है:
- रोजगार के मुद्दे
- शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट
- डिजिटल कैंपेन
सोशल मीडिया के जरिए युवा वोटर्स तक पहुंचने की कोशिश भी तेज हो गई है.
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