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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का अलौकिक श्रृंगार, देश-विदेश के मंदिरों से आया प्रसाद, जानें आरती की टाइमिंग
Current image: महाशिवरात्रि पर काशी में भव्य नजारा

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव की नगरी काशी पूरी तरह शिवमय हो गई है. हर ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज रहे हैं. आज श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व का आध्यात्मिक संगम बन गया है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचे हैं. मंदिर परिसर, गंगा घाट और गलियां भक्तों की आस्था से सराबोर नजर आ रही हैं. महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा विश्वनाथ का अलौकिक श्रृंगार किया गया है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का दर्शन करने से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

देश-विदेश के मंदिरों से आया बाबा के लिए प्रसाद और वस्त्र

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर काशी में एक अद्भुत परंपरा देखने को मिल रही है. देश के 54 प्रमुख मंदिरों और दुनिया के 8 बड़े मंदिरों से बाबा विश्वनाथ के लिए प्रसाद, वस्त्र और पूजन सामग्री भेजी गई है. इतना ही नहीं, विश्वभर के 62 बड़े मंदिरों से बाबा के लिए भोग और पूजित वस्त्र काशी पहुंचे हैं.

कहां-कहां से आया प्रसाद?

भारत के 54 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद आया. वहीं, मलयेशिया के 7 मंदिरों से भोग सामग्री, श्रीलंका के कोलंबो स्थित एक मंदिर से विशेष प्रसाद और देश-विदेश के मंदिरों से भेजे गए पूजित वस्त्र, रज और तीर्थजल.
इन सभी पवित्र सामग्रियों को विधिवत पूजन के बाद बाबा विश्वेश्वर के श्रीचरणों में अर्पित किया जा रहा है. यह परंपरा काशी को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और मजबूत करती है.

बाबा विश्वनाथ का अलौकिक श्रृंगार, देखते ही बन रहा है नज़ारा

महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार बेहद भव्य और दिव्य रूप में किया गया है. फूलों, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और रुद्राक्ष से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया. बाबा के मस्तक पर चंद्रमा की झलक, त्रिपुंड का दिव्य रूप और फूलों से सजी झांकी देखकर श्रद्धालु भावुक हो रहे हैं.

श्रृंगार की खास बातें:

  • देश-विदेश से आए फूलों से सजावट
  • विशेष रेशमी वस्त्र
  • चांदी-सोने के आभूषण
  • दिव्य प्रकाश व्यवस्था
  • शिव-शक्ति के स्वरूप की झलक

श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा का यह रूप साक्षात शिवलोक जैसा अनुभव कराता है.

भक्तों का जनसैलाब, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. सुबह से ही मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गईं. गंगा घाटों पर स्नान के बाद श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए विश्वनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं.

मंदिर प्रशासन के खास इंतजाम

भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं:

  • अलग-अलग मार्गों से दर्शन व्यवस्था
  • वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष लाइन
  • ड्रोन और CCTV से सुरक्षा निगरानी
  • मेडिकल टीम और एंबुलेंस की व्यवस्था
  • पेयजल और प्रसाद वितरण की सुविधा

प्रशासन का कहना है कि कोशिश यही है कि हर शिवभक्त को बिना किसी परेशानी के बाबा के दर्शन हो सकें.

ट्रैफिक डायवर्जन और श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूट प्लान

काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्लान में अस्थायी बदलाव किए गए हैं. कई मार्गों को वन-वे किया गया है ताकि पैदल श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान हो सके. रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और प्रमुख पार्किंग स्थलों से मंदिर तक जाने के लिए शटल सेवा और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है. इससे बुजुर्ग श्रद्धालुओं और बच्चों के साथ आए परिवारों को काफी राहत मिल रही है.

कब होंगे बाबा के दर्शन? महाशिवरात्रि पर जाने आरती की टाइमिंग

महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष आरतियों का आयोजन किया जाता है. भक्तों के लिए आज के दिन की प्रमुख आरती टाइमिंग इस प्रकार है:

  • मंगला आरती: सुबह 3:00 बजे
  • भोग आरती: दोपहर 12:00 बजे
  • संध्या आरती: शाम 7:00 बजे
  • शयन आरती: रात 11:00 बजे

महाशिवरात्रि के कारण कई बार आरती के समय में भीड़ को देखते हुए बदलाव भी किया जा सकता है. इसलिए भक्तों को मंदिर प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है.

काशी क्यों है महाशिवरात्रि पर खास?

काशी को शिव की नगरी कहा जाता है. मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव यहां वास करते हैं. महाशिवरात्रि के दिन काशी में दर्शन करने का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर बाबा का दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और काशी में महाशिवरात्रि का व्रत रखने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं. इसी आस्था के कारण देश-विदेश से श्रद्धालु इस दिन काशी पहुंचते हैं.

विदेशी श्रद्धालुओं में भी दिखा उत्साह

इस बार महाशिवरात्रि पर विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी है. जैसे नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड समेत कई देशों से आए भक्त बाबा के दर्शन करने पहुंचे हैं. कुछ विदेशी श्रद्धालु पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में मंदिर पहुंचे, जो काशी की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है.

गंगा घाटों पर भी धार्मिक अनुष्ठान

महाशिवरात्रि के अवसर पर गंगा घाटों पर विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान किए जा रहे हैं. श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर रहे हैं. कई जगहों पर भजन-कीर्तन और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ हो रहा है.

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