
Japan Elections 2026: जापान में आम चुनाव 2026 के लिए रविवार सुबह से मतदान शुरू हो गया है. शभर में लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में जापान की राजनीतिक दिशा क्या होगी. इस चुनाव में संसद के निचले सदन, यानी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की कुल 465 सीटों के लिए 1,284 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. देश के सभी प्रमुख शहरों और ग्रामीण इलाकों में मतदान केंद्र सुबह से खुल गए हैं.स्थानीय समय के अनुसार रात 8 बजे तक वोटिंग होगी, जिसके बाद मतगणना शुरू होगी.देर रात तक शुरुआती रुझान सामने आने की उम्मीद है. पूरे देश की नजरें इस चुनाव पर टिकी हैं, क्योंकि इसके नतीजे यह तय करेंगे कि मौजूदा सरकार बनी रहेगी या देश को नया नेतृत्व मिलेगा.
इस चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासक गठबंधन लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) और जापान इनोवेशन पार्टीएक बार फिर बहुमत हासिल कर पाएगा या नहीं. अगर गठबंधन बहुमत में रहता है, तो प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार आगे भी काम करती रहेगी.
हाल के सर्वेक्षणों के मुताबिक, सत्तारूढ़ गठबंधन के पास बहुमत पाने की अच्छी संभावना बताई जा रही है.जापान के बड़े मीडिया संस्थानों के सर्वे में संकेत मिले हैं कि एलडीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को चुनाव में बढ़त मिल सकती है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आखिरी समय में मतदाताओं का मूड बदलना जापान में आम बात है, इसलिए अंतिम नतीजे कुछ अलग भी हो सकते हैं.
विपक्ष की स्थिति और नई पार्टियों की चुनौती
वहीं , क्योदो न्यूज के एक सर्वे के अनुसार, जापान की संवैधानिक डेमोक्रेटिक पार्टी और एलडीपी की पूर्व सहयोगी कोमेटो द्वारा बनाई गई नई विपक्षी पार्टी ‘सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस’ को चुनाव से पहले की तुलना में नुकसान होता दिख रहा है. विपक्षी दल इस बार बिखरे हुए नजर आए और सत्तारूढ़ गठबंधन को सीधी टक्कर देने में उन्हें मुश्किल हुई.
हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर लोगों में बदलाव की इच्छा बढ़ी है. वे उम्मीद कर रहे हैं कि मतदान के आखिरी घंटों में मतदाता सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं. यही वजह है कि सभी दल अपने-अपने समर्थकों से घर से निकलकर वोट डालने की अपील कर रहे हैं.
अनिश्चित मतदाता बन सकते हैं ‘गेम चेंजर’
सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में मतदाता अब भी असमंजस में हैं. ऐसे मतदाता अंतिम समय में फैसला लेते हैं और कई बार नतीजों की दिशा बदल देते हैं. चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अनिश्चित मतदाता बड़ी संख्या में मतदान करते हैं, तो परिणामों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता हैं .
युवा मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वालों की भूमिका इस चुनाव में खास मानी जा रही है. रोजगार, महंगाई, आवास और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दे युवाओं के लिए अहम हैं. पार्टियों ने अपने प्रचार में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है.
एलडीपी से जुड़े घोटालों का असर
इस चुनाव में सत्तारूढ़ दल एलडीपी से जुड़े कुछ घोटालों की चर्चा भी चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही है.विपक्षी दलों ने प्रचार के दौरान इन मुद्दों को जोर -शोर से उठाया और सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए.
हालांकि, एलडीपी नेतृत्व का कहना है कि सरकार ने स्पष्टता, बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं और जनता का भरोसा जीतने की कोशिश की है.विश्लेषकों का मानना है कि घोटालों का असर शहरी इलाकों में ज्यादा देखने को मिल सकता है, जहां मतदाता ज्यादा जागरूक माने जाते हैं.
प्रधानमंत्री ताकाइची का बड़ा फैसला: समय से पहले चुनाव
प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 23 जनवरी को अचानक निचले सदन को भंग कर जल्दी चुनाव कराने का फैसला लिया था. यह पिछले 60 सालों में पहली बार हुआ जब संसद के नियमित सत्र की शुरुआत में ही सदन भंग किया गया.
प्रधानमंत्री ने अपने फैसले को जनता से ताजा जनता का निर्णय लेने की कोशिश बताया.उन्होंने साफ कहा है कि अगर उनका गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाता है, तो वह प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगी. इस बयान ने चुनाव को और ज्यादा रोचक बना दिया है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा है.
मतदान की प्रक्रिया और प्रशासन की तैयारी
जापान में मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से कराने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मतदान केंद्रों पर तैनात हैं. बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि वे आसानी से मतदान कर सकें.
कई शहरों में लोग सुबह से ही कतार में लगकर वोट डालते नजर आए. टोक्यो, ओसाका और योकोहामा जैसे बड़े शहरों में मतदान को लेकर खासा उत्साह देखा गया. ग्रामीण इलाकों में भी मतदान केंद्रों पर अच्छी भीड़ दिखी, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है.
अंतरराष्ट्रीय नजरें भी है जापान के चुनाव पर
जापान एशिया की एक बड़ी आर्थिक और राजनीतिक शक्ति है. ऐसे में यहां होने वाले चुनावों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर रहती है.जापान की विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति और वैश्विक व्यापार संबंध आने वाले वर्षों में किस दिशा में जाएंगे, यह भी इस चुनाव के नतीजों से प्रभावित होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा सरकार बनी रहती है, तो विदेश नीति में निरंतरता देखने को मिलेगी. वहीं सत्ता में बदलाव होने पर नीतियों में कुछ नए प्रयोग हो सकते हैं.






