
Jammu-Kashmir News: जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज होने जा रही है. जम्मू-कश्मीर विधानसभा का बजट सत्र सोमवार, 2 फरवरी से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में उत्साह और गर्मी दोनों देखने को मिल रही है. यह सत्र न सिर्फ सरकार के कामकाज की दिशा तय करेगा, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और विकास की तस्वीर भी साफ करेगा. माना जा रहा है कि, इस बजट सत्र में विकास, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है. विपक्षी दल सरकार को उसके चुनावी वादों की याद दिलाते हुए घेरने की रणनीति बना रहे हैं.
2 फरवरी से शुरू हो रहा बजट सत्र
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का यह बजट सत्र सोमवार (2 फरवरी) से शुरू होगा। सत्र की शुरुआत मनोज सिन्हा के अभिभाषण से होगी. उपराज्यपाल के संबोधन के साथ ही सदन की कार्यवाही औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपराज्यपाल के भाषण में सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और भविष्य की योजनाओं की झलक देखने को मिल सकती है.
6 फरवरी को पेश होगा बजट
इस बजट सत्र का सबसे अहम दिन 6 फरवरी होगा, जब वित्त विभाग का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला विधानसभा में बजट पेश करेंगे.यह उनके मौजूदा कार्यकाल का दूसरा बजट होगा. इससे पहले उमर अब्दुल्ला ने 7 मार्च 2025 को अपना पहला बजट पेश किया था. इस बार के बजट से लोगों को खासतौर पर रोजगार के नए अवसर, युवाओं के लिए योजनाएं, सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं और शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च को लेकर बड़ी उम्मीदें हैं.
पूर्ण राज्य का दर्जा बना सबसे बड़ा सियासी मुद्दा
इस बजट सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर होने की संभावना है. विपक्षी दल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे सरकार से इस मुद्दे पर साफ जवाब मांगेंगे. चुनाव के दौरान किए गए वादों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ सकता है. माना जा रहा है, कि इस मुद्दे पर सदन में तीखी बहस, नोकझोंक और हंगामे की स्थिति भी बन सकती है.
27 दिनों तक चलेगा विधानसभा का पांचवां सत्र
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का यह पांचवां सत्र कुल 27 दिनों तक चलेगा. सत्र को तीन महीने की अवधि में दो चरणों में आयोजित किया जाएगा. इस लंबे सत्र के दौरान बजट पर विस्तृत चर्चा, विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा, जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल-जवाब जैसी अहम प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.
विकास और रोजगार पर रहेगी सबकी नजर
बजट सत्र से आम लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद विकास और रोजगार को लेकर है. बेरोजगारी, खासकर युवाओं में, लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रहा है. ऐसे में सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह सरकारी भर्तियों को गति दे, स्वरोजगार योजनाओं को मजबूत करे, पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा दे ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सके.
बुनियादी सुविधाओं पर भी होगी चर्चा
जम्मू-कश्मीर में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे बुनियादी मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं. इस बजट सत्र में इन विषयों पर भी सरकार से ठोस जवाब और योजनाओं की उम्मीद की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन क्षेत्रों में सही निवेश हुआ, तो इसका सीधा असर आम जनता की जिंदगी पर पड़ेगा.
विधानसभा अध्यक्ष ने दी जानकारी
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने बताया कि बजट सत्र के सुचारू संचालन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित रखने, विधायकों की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई है.
सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम
बजट सत्र को देखते हुए विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. प्रशासन किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क है. सूत्रों के मुताबिक अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, प्रवेश बिंदुओं पर कड़ी जांच और निगरानी बढ़ाई गई है ताकि सत्र शांतिपूर्ण तरीके से चल सके.
विपक्ष की रणनीति और सरकार की तैयारी
विपक्षी दल इस सत्र में सरकार को घेरने के लिए पूरी तैयारी में हैं. खासकर चुनावी वादों की याद, राज्य के दर्जे का मुद्दा और विकास कार्यों की प्रगति पर सवाल उठाए जा सकते हैं. वहीं सरकार का कहना है,कि वह हर सवाल का जवाब देने और अपनी नीतियों को मजबूती से रखने के लिए तैयार है.
आम लोगों की क्या है उम्मीदें?
आम जनता की नजरें इस बजट सत्र पर टिकी हैं. लोगों को उम्मीद है कि उन्हें इस बजट सत्र में महंगाई से राहत मिलेगी, रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और विकास योजनाएं जमीन पर उतरेंगे. यह बजट सत्र सरकार के लिए जनता के भरोसे पर खरा उतरने का एक बड़ा मौका माना जा रहा है.






