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ईरान युद्ध के बीच अब भारत में महंगा हो सकता है ‘पानी’,बढ़ती लागत से कंपनियों की बढ़ी चिंता
Current image: Packaged Drinking Water Price Hike

Packaged Drinking Water Price Hike: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब धीरे-धीरे भारत के बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। जिसमें पहले LPG और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की चर्चा थी, लेकिन अब इसका असर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर यानी बोतलबंद पानी के कारोबार पर भी पड़ता दिख रहा है। उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वैश्विक तेल कीमतों में तेजी जारी रहती है और सप्लाई चेन की समस्याएं बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में भारत में बोतलबंद पानी महंगा हो सकता है।

जानकारी के लिए बता दें कि गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही बढ़ती लागत ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। जिसमें कई पैकेज्ड वाटर कंपनियों ने अपने वितरकों को पत्र भेजकर संकेत दिया है कि उत्पादन और पैकेजिंग की लागत तेजी से बढ़ रही है।वहीं, इसके चलते कुछ कंपनियों ने वितरण स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी भी शुरू कर दी है।

युद्ध का असर अब पानी के कारोबार पर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। जिसमें खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण कई उद्योगों की लागत बढ़ गई है। पैकेज्ड पानी उद्योग भी इससे अछूता नहीं रहा है।बोतलबंद पानी की प्लास्टिक बोतलें पेट्रोलियम उत्पादों से बनती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उससे बनने वाले कच्चे माल की लागत भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि अब पानी की बोतलों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।

पॉलीमर की कीमतों में बड़ा उछाल

बता दें कि उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों में भारी बढ़ोतरी हुई है। दरअसल,यह पॉलीमर कच्चे तेल से तैयार होता है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर इस पर पड़ता है।

जानकारी के मुताबिक बोतल बनाने वाली सामग्री की कीमत प्रति किलोग्राम लगभग 50 % तक बढ़ गई है। इससे कंपनियों के लिए उत्पादन लागत को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। कई कंपनियों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उन्हें खुदरा कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

पैकेजिंग की लागत भी तेजी से बढ़ी

बताया जा रहा है कि केवल प्लास्टिक बोतल ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग से जुड़ी अन्य चीजों की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। उद्योग के मुताबिक बोतलों के ढक्कन यानी कैप की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इसके अलावा पानी की बोतलों के लिए इस्तेमाल होने वाले लेबल, चिपकाने वाली टेप और कॉरुगेटेड बॉक्स की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इन सभी चीजों का इस्तेमाल पैकेजिंग और सप्लाई के दौरान होता है, इसलिए लागत बढ़ने का सीधा असर अंतिम कीमत पर पड़ता है।

भारत का पैकेज्ड वाटर बाजार तेजी से बढ़ रहा

भारत का पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर बाजार तेजी से बढ़ने वाले उद्योगों में शामिल है। जानकारी के मुताबिक देश में यह बाजार करीब 5 अरब डॉलर का माना जाता है। वहीं, शहरी इलाकों में बोतलबंद पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। बता दें कि इसके पीछे एक बड़ी वजह देश में सुरक्षित पीने के पानी की कमी भी है। कई इलाकों में नल या भूजल की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, इसलिए लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर होते हैं।

भूजल प्रदूषण भी बड़ी समस्या

एक्सपर्ट्स के अनुसार भारत में भूजल की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। जिसमें कई शोध रिपोर्ट्स में बताया गया है कि देश में लगभग 70 % भूजल किसी न किसी रूप में प्रदूषित है। अब ऐसे में बड़ी आबादी सुरक्षित पानी के लिए बोतलबंद पानी या आरओ सिस्टम पर निर्भर रहती है। खासकर शहरों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और पर्यटन स्थलों पर बोतलबंद पानी की मांग बहुत अधिक रहती है।

गर्मी के मौसम में बढ़ती है मांग

भारत में मार्च से ही कई राज्यों में गर्मी बढ़ने लगती है और अप्रैल-मई में तापमान काफी ज्यादा हो जाता है। इस दौरान बोतलबंद पानी की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। अब ऐसे में गर्मी के मौसम में छोटे दुकानदार, होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे ठेलों पर पानी की बोतलों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि कंपनियां इस समय उत्पादन और सप्लाई को बढ़ाने की कोशिश करती हैं। लेकिन इस बार युद्ध के कारण बढ़ती लागत ने उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

कंपनियों ने शुरू की कीमतें बढ़ाने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, कुछ पैकेज्ड वाटर कंपनियों ने पहले ही वितरकों के स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। हालांकि अभी खुदरा बाजार में इसका पूरा असर दिखाई नहीं दिया है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को बोतलबंद पानी के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं।

सप्लाई चेन पर भी पड़ा असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। जिसमें कई देशों में शिपिंग और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो रही है। अब ऐसे में इसका असर भारत के उद्योगों पर भी दिखाई दे रहा है। कंपनियों को कच्चा माल महंगा मिलने के साथ-साथ सप्लाई में भी देरी का सामना करना पड़ रहा है।

उपभोक्ताओं पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ

बता दें कि आने वाले समय में बोतलबंद पानी की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। खासतौर पर गर्मी के मौसम में लोग बड़ी मात्रा में पानी की बोतलें खरीदते हैं। जिसमें रेलवे यात्रियों, ऑफिस जाने वाले लोगों और छोटे दुकानदारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च साबित हो सकता है।

एक्सपर्ट्स की क्या है राय

उद्योग एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हो जाती हैं और सप्लाई चेन में सुधार होता है, तो स्थिति ठीक हो सकती है। लेकिन अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो कई उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बोतलबंद पानी उद्योग के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। कंपनियां फिलहाल लागत को संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अगर दबाव बढ़ता है तो कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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