
Iran War Update: ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष लगातार नई ऊँचाइयों को छू रहा है। जिसमें पिछले एक महीने से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी इस तनाव ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी असर डाला है। लगातार हो रहे हवाई हमले, मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाईयों ने क्षेत्र की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका के 15 पॉइंट वाले शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अस्थायी युद्धविराम के बदले होर्मुज स्ट्रेट खोलने से इनकार कर दिया। आइए जानते हैं इस संघर्ष से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण अपडेट्स।
ईरान ने अमेरिका का 15 सूत्री शांति प्रस्ताव ठुकराया
ईरान ने अमेरिका के 15 पॉइंट वाले शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने बताया कि प्रस्ताव में शामिल शर्तें अत्यधिक मांगों वाली हैं, जिन्हें ईरान स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव कई देशों के जरिए ईरान तक पहुंचा था, लेकिन इसमें ऐसी शर्तें शामिल थीं, जो देश के हितों के खिलाफ थीं। साथ ही, बाघाई ने स्पष्ट किया कि किसी प्रस्ताव का जवाब देना कमजोरी नहीं, बल्कि बातचीत का एक सामान्य हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी शर्तों को तैयार कर रहा है और उचित समय आने पर इसे साझा किया जाएगा। ईरान ने दोहराया कि वह किसी भी दबाव में आकर निर्णय नहीं करेगा और जो भी फैसला होगा, वह केवल देश के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
ईरान ने अस्थायी युद्धविराम के बदले होर्मुज खोलने से किया इंकार
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अस्थायी युद्धविराम के बदले होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार नहीं है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से ईरान को तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि ईरान के अधिकारियों ने कहा कि अस्थायी डील का कोई अर्थ नहीं क्योंकि अमेरिका स्थायी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है। ईरान का मानना है कि किसी भी निर्णय में दबाव के बजाय देश के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री ने भारत और रूस से की बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने हाल ही में भारत और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ फोन पर बातचीत की। उन्होंने अमेरिका और इजराइल के हमलों के परिणामस्वरूप क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक असर पर चर्चा की।अराघची ने बताया कि पिछले 37 दिनों में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और नागरिक ढांचों को निशाना बनाया। इसमें फैक्ट्रियां, अस्पताल, स्कूल, रिहायशी इलाके और परमाणु केंद्र शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर जिम्मेदार रवैया अपनाएं। वहीं, अराघची ने चेतावनी दी कि अमेरिका और इजराइल के हमलों का असर न केवल ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता और सेना अपने देश के हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
आईआरजीसी के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल खदेमी की मौत
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल खदेमी की मौत से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरानी स्टेट मीडिया ने पुष्टि की कि खदेमी अमेरिकी-इजरायली हमले में शहीद हुए। जिसमें ईरान ने खदेमी की मौत के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया और इसे देश को अस्थिर करने की साजिश बताया। आईआरजीसी ने कहा कि उनके अंतिम संस्कार को लेकर जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इस घटना ने ईरान की सुरक्षा नीतियों और देश की सैन्य रणनीतियों को और भी महत्व दिया है। इस्राइल के रक्षा मंत्री ने भी खदेमी के मारे जाने की पुष्टि की और अपने सैन्य बल की तारीफ की। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
बुशेहर परमाणु प्लांट पर हमले, रेडिएशन रिसाव का खतरा
ईरान के एकमात्र सक्रिय परमाणु ऊर्जा प्लांट बुशेहर पर लगातार हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को पत्र लिखकर कहा कि केवल चिंता जताना पर्याप्त नहीं है। जिसमें उन्होंने बताया कि प्लांट पर अब तक चार बार हमले हो चुके हैं। हाल ही में 4 अप्रैल को हुए हमले में एक सुरक्षा कर्मी की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। ईरान ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले जारी रहे तो रेडियोएक्टिव रिसाव का खतरा बढ़ सकता है, जो पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति नाजुक बनी हुई है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा होगा।
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