
डिजिटल जनगणना 2027: भारत में 2027 की जनगणना इस बार कई मायनों में खास होने जा रही है। जिसमें भारत सरकार ने पहली बार डिजिटल जनगणना कराने का फैसला लिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया आसान, तेज और पारदर्शी बनेगी। यह जनगणना 2011 के बाद पहली बार हो रही है और आजादी के बाद की आठवीं जनगणना होगी।
जानकारी के लिए बता दें कि इस बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी भरने (Self-Enumeration) का विकल्प मिलेगा, जो इस प्रक्रिया को और भी आधुनिक और सुविधाजनक बनाता है। आइए जानते हैं यहां पूरी जानकारी कि डिजिटल जनगणना क्या है, कैसे होगी और आपको क्या करना होगा।
क्या है डिजिटल जनगणना?
डिजिटल जनगणना का मतलब है कि अब डेटा कागज पर नहीं, बल्कि मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए एकत्र किया जाएगा। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि डेटा ज्यादा सटीक और सुरक्षित भी रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं को बेहतर तरीके से बनाया जा सकेगा और संसाधनों का सही वितरण होगा।
दो चरणों में होगी जनगणना
डिजिटल जनगणना को दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण: हाउस लिस्टिंग (1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026) बता दें कि इस चरण में घरों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।
- मकान की स्थिति
- घर में उपलब्ध सुविधाएं
- पानी, बिजली, शौचालय जैसी बेसिक सुविधाएं
- घर में मौजूद संपत्तियां
दूसरा चरण: जनगणना (Population Enumeration) इसमें लोगों से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।
- परिवार के सदस्य
- शिक्षा, रोजगार
- सामाजिक और आर्थिक स्थिति
- सांस्कृतिक डेटा
Self-Enumeration क्या है और कैसे करें?
दरअसल इस बार सबसे बड़ा बदलाव है Self-Enumeration यानी आप खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। जिसमें प्रोसेस इस तरह काम करेगा।
- सबसे पहले आपको आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
- रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक Reference ID मिलेगी।
- उस ID के जरिए आप अपनी पूरी जानकारी भर सकते हैं।
- बाद में यह ID आपके इलाके के एन्यूमरेटर को दिखानी होगी।
कितनी भाषाओं में उपलब्ध होगी सुविधा?
डिजिटल जनगणना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए इसे 16 भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा, जैसे हिंदी,अंग्रेजी, बंगाली,तमिल,तेलुगु, मराठी,पंजाबी,उर्दू, कन्नड़, मलयालम, ओडिया आदि।
डेटा सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम हैं?
डिजिटल प्लेटफॉर्म होने के कारण डेटा सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल होता है। इसको लेकर सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। मृत्युंजय कुमार नारायण (रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर) के अनुसार है।
- डेटा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन में रहेगा।
- साइबर सिक्योरिटी एजेंसियों की निगरानी होगी।
- सर्वर लेवल पर सुरक्षा मजबूत होगी।
- किसी भी गड़बड़ी पर एन्यूमरेटर वेरिफिकेशन करेगा।
जाति गणना को लेकर क्या स्थिति है?
इस जनगणना में जाति गणना को शामिल किया जाएगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है।
- जाति का रजिस्ट्रेशन अलग से होगा।
- लोग खुद अपनी जाति दर्ज करेंगे।
NPR को लेकर क्या बड़ा अपडेट है?
इस बार एक बड़ा बदलाव यह भी है कि है। जिसमें नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को इस जनगणना के साथ अपडेट नहीं किया जाएगा।नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर को पहले हाउस लिस्टिंग के साथ जोड़ने की योजना थी, लेकिन अब 2027 की जनगणना में इसे शामिल नहीं किया गया है। यह फैसला कई मायनों में अहम माना जा रहा है।
सरकार ने कितना बजट तय किया है?
डिजिटल जनगणना के लिए सरकार ने करीब 11,718 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसमें टेक्नोलॉजी, डेटा सुरक्षा, ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा।
डिजिटल जनगणना क्यों है खास?
इस बार की जनगणना कई कारणों से ऐतिहासिक मानी जा रही है:
- पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया।
- खुद डेटा भरने की सुविधा।
- पेपरलेस सिस्टम।
- तेज और सटीक डेटा कलेक्शन।
- रियल टाइम अपडेट की संभावना।
जनगणना से देश को क्या फायदा होगा?
जनगणना सिर्फ आंकड़े जुटाने का काम नहीं है, बल्कि यह देश की भविष्य की योजनाओं की नींव होती है। इसके आधार पर सरकार ने नई योजना बनाई हैं।
- नई योजनाएं बनाती है।
- बजट तय करती है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करती है।
- रोजगार और विकास की रणनीति बनाती है।
प्रधानमंत्री का विजन
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। डिजिटल जनगणना से देश में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और प्रशासनिक कामकाज और भी आसान होगा।






