
Haryana: हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है. सत्र की शुरुआत सुबह 11 बजे राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष के अभिभाषण से होगी.इस अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यों की तस्वीर पेश करेंगे.हरियाणा विधानसभा में यह राज्यपाल घोष का पहला अभिभाषण होगा, इसलिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से इसे खास माना जा रहा है. बजट सत्र के दौरान राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास योजनाओं और जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे सरकार को कई मुद्दों पर घेरेंगे.
सत्र का पहले दिन की शुरुआत होगी अभिभाषण, शोक प्रस्ताव और औपचारिकताएं के साथ
आज के दिन की कार्यवाही अपेक्षाकृत संक्षिप्त रहेगी.सुबह 11 बजे राज्यपाल का अभिभाषण होगा,इसके बाद शोक प्रस्ताव पढ़े जाएंगे. वहीं,कुछ जरूरी सरकारी कागजात सदन में रखे जाएंगे और फिर पहले दिन की कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी. इसके बाद 23 फरवरी से नियमित कार्यवाही शुरू होगी.यह बजट सत्र 18 मार्च तक चलेगा.सत्र के दौरान सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाएगी, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगा.
2 मार्च को पेश होगा बजट, सीएम सैनी का दूसरा बजट
इस सत्र का सबसे अहम दिन 2 मार्च होगा, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वित्त मंत्री के तौर पर अपना दूसरा बजट पेश करेंगे.इस बजट से जनता को रोजगार, महंगाई, किसानों, युवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई उम्मीदें हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार इस बार युवाओं के लिए रोजगार योजनाओं, ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बजट में फोकस कर सकती है.
किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष?
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह सत्र के दौरान सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह सरकार को घेरेगी. विपक्ष जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है, उनमें शामिल हैं बाहरी युवाओं की भर्ती का मुद्दा, खाली पदों पर भर्ती न होना, छंयास गांव में लोगों की मौत का मामला, प्रदेश में बढ़ता अपराध और नशा, जलभराव की समस्या, एसवाईएल (SYL) नहर विवाद ,प्रदेश की आर्थिक बदहाली और कांग्रेस विधायक पर दर्ज मामलों को लेकर सरकार पर सवाल.
इसके अलावा, 24 फरवरी को विधायकों और 25 फरवरी को संगठन द्वारा विधानसभा घेराव की भी घोषणा की गई है, जिससे सियासी माहौल और गरमाने की संभावना है.
विपक्ष को जवाब देने के लिए सरकार की तैयारी
विपक्ष के तेवरों को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहले ही मोर्चा संभाल लिया है. गुरुवार को उन्होंने पहले विधायकों की बैठक बुलाई फिर अलग से मंत्रियों के साथ बैठक की.इन बैठकों में सीएम सैनी ने मंत्रियों और विधायकों को सत्र के दौरान एकजुट रहने, सरकार की उपलब्धियों को मजबूती से रखने और विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने के निर्देश दिए.
वहीं, सरकार का दावा है कि कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है. विकास कार्य तेज़ी से चल रहे हैं और रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं भी लाई जा रही हैं.
सत्ता-विपक्ष में टकराव तय, सदन में गरमागरम बहस के आसार
हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र हमेशा से सियासी हलचल के लिए जाना जाता है. इस बार भी सत्ता और विपक्ष के बीच तेज टकराव के संकेत मिल रहे हैं. कांग्रेस जहां सरकार को विफलताओं के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बना रही है, वहीं भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं के जरिए जवाब देने की तैयारी में है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एसवाईएल नहर, बेरोजगारी और अपराध जैसे मुद्दे सदन में सबसे ज्यादा गर्म रह सकते हैं.
विधानसभा सत्र और संभावित घेराव को देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पुलिस और प्रशासन ने विधानसभा के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो.
बजट सत्र से जनता की बड़ी उम्मीदें
बजट सत्र को लेकर आम जनता की नजरें सरकार के फैसलों पर टिकी हैं. महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती रोजमर्रा की परेशानियों से जूझ रहे लोग चाहते हैं कि सरकार इस बार के बजट में रोजगार सृजन, किसानों को राहत और शहरी-ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार पर ठोस घोषणाएं करे.खासकर युवाओं को सरकारी नौकरियों और स्किल डेवलपमेंट से जुड़ी नई योजनाओं की उम्मीद है.
किसानों और ग्रामीण इलाकों पर रहेगा फोकस?
हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है. ऐसे में किसानों को बजट से काफी उम्मीदें हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सिंचाई सुविधाएं, फसल बीमा और ग्रामीण सड़कों जैसी योजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है. ग्रामीण इलाकों में जलभराव और ड्रेनेज की समस्या लंबे समय से लोगों की परेशानी बनी हुई है, जिस पर विपक्ष सरकार से ठोस जवाब मांगेगा.
शहरी विकास और बुनियादी ढांचे पर बहस
शहरी इलाकों में ट्रैफिक, सीवर और पानी की समस्या भी सत्र के दौरान उठ सकती है. विपक्ष का आरोप है कि तेजी से बढ़ते शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास आबादी के हिसाब से नहीं हो पा रहा. वहीं सरकार का कहना है कि मेट्रो विस्तार, सड़क निर्माण और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के जरिए शहरी विकास को गति दी जा रही है.
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