
Janakpuri Bike Accident: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने शहर की व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि, जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय बैंक कर्मचारी कमल ध्यानी की मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिस ने संबंधित ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक, कमल ध्यानी एक प्राइवेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। घटना वाली रात वह अपने दफ्तर से घर लौट रहे थे। रात करीब पौने 12 बजे उन्होंने परिवार को फोन कर कहा था कि वह 10 मिनट में घर पहुंच जाएंगे, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं हो सका। जोगिंदर सिंह मार्ग पर सड़क के बीच खोदे गए गहरे गड्ढे में उनकी बाइक समेत गिरने से उनकी जान चली गई।
अंधेरा और बिना चेतावनी का गड्ढा बना मौत की वजह
परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस जगह खुदाई का काम चल रहा था, वहां न तो सही बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी, जिससे रात के अंधेरे में गड्ढा दिखाई नहीं दिया। हेलमेट पहनने के बावजूद गंभीर चोट लगने और समय पर मदद न मिलने से कमल की मौत हो गई। वहीं, घटना के बाद घायल कमल को फायर ब्रिगेड की मदद से बाहर निकाला गया और दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने दर्ज किया केस
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत एफआईआर दर्ज की है। FIR में कहा गया है कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सड़क के बीच बिना सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी संकेत लगाए गहरा गड्ढा खोदा गया था, जो सीधे तौर पर हादसे का कारण बना। साथ ही, मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि अब तक इस घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया है।
परिवार भटकता रहा, मदद नहीं मिली
कमल ध्यानी के परिवार का आरोप है कि वह पूरी रात उन्हें खोजने के लिए जनकपुरी, सागरपुर, विकासपुरी और रोहिणी समेत कई पुलिस थानों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन समय पर कोई ठोस मदद नहीं मिली। परिवार का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सक्रिय हो जाती, तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी।
नोएडा हादसे के बाद भी नहीं लिया सबक
इस घटना से पहले नोएडा में भी एक युवक की गड्ढे में डूबकर मौत हो चुकी है। उस हादसे को अभी कुछ ही दिन बीते थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला। दिल्ली की ताजा घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि लापरवाही किस तरह जानलेवा साबित हो रही है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
घटना के बाद लोगों में गुस्सा है और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। कई लोगों का कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।
सरकार की कार्रवाई पर सवाल
सरकार की ओर से अधिकारियों के निलंबन को शुरुआती कदम माना जा रहा है, लेकिन पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग इसे पर्याप्त नहीं मानते। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
रोज की सड़क बनी आखिरी सफर
कमल जिस सड़क से रोज घर आते-जाते थे, वही सड़क उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गई। परिवार को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि घर पहुंचने का वादा करने वाला बेटा हमेशा के लिए चला गया। वहीं, यह घटना राजधानी दिल्ली में चल रहे विकास कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। सड़कों पर खुदाई के दौरान यदि सही बैरिकेडिंग, रोशनी और चेतावनी संकेत लगाए जाएं, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी की नजर इस बात पर है कि पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलता है।
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