
Airbus: वडोदरा में टाटा और एयरबस मिलकर C–295 परिवहन विमान बना रहे हैं। जिसमें यह मल्टीरोल विमान भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगा। आइए जानते हैं यहां पूरी खबर
Airbus: भारत की रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम वडोदरा की धरती पर आकार ले रहा है। बता दें कि, यहां टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस मिलकर C-295 परिवहन विमान की शुरुआत कर रहे हैं। साथ ही, यह विमान केवल एक मालवाहक जहाज नहीं, बल्कि एक आधुनिक मल्टीरोल एयरक्राफ्ट है, जो भारतीय वायुसेना की रणनीतिक जरूरतों को नए स्तर पर ले जाएगा।
भारत और स्पेन के कूटनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर यह सहयोग और भी खास हो गया है। जिसमें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस की हालिया मुलाकात में इस बात की पुष्टि हुई कि वडोदरा फैक्ट्री से पहला ‘मेड इन इंडिया’ (Made In India)C-295 विमान इसी साल सितंबर से पहले तैयार हो जाएगा। साथ ही, यह भारत के निजी रक्षा क्षेत्र में विमान निर्माण का पहला बड़ा अहम कदम होगा।
वडोदरा बना आत्मनिर्भरता का नया केंद्र
दरअसल, अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री स्तर पर उद्घाटन के बाद वडोदरा की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) पूरी रफ्तार से काम कर रही है। वहीं, यह भारत की पहली निजी विमान निर्माण फैक्ट्री है। इसमें खास बात यह है कि एयरबस ने यूरोप के बाहर पहली बार C-295 की पूरी असेंबली लाइन किसी निजी भारतीय कंपनी के साथ मिलकर स्थापित की है। यहां विमान का ढांचा तैयार करने से लेकर परीक्षण, डिलीवरी और सर्विसिंग तक का काम होगा। इस खास प्रोजेक्ट से गुजरात में हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों और कुशल युवाओं को रोजगार मिला है। साथ ही देश में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी मजबूती मिल रही है।
कितने विमान बनेंगे वडोदरा में
विदेश मंत्रालय का कहना है कि, भारतीय वायुसेना के लिए कुल 56 C-295 विमान खरीदे जा रहे हैं। वहीं, इनमें से 16 विमान स्पेन में तैयार होकर भारत आ चुके हैं या आ रहे हैं, जबकि शेष 40 विमान पूरी तरह वडोदरा स्थित टाटा फैक्ट्री में बनाए जाएंगे। ये विमान वायुसेना के पुराने एवरो-748 विमानों की जगह लेंगे, जो दशकों से सेवा में थे।
यह सौदा सिर्फ विमान खरीद का नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय निर्माण क्षमता बढ़ाने का भी है। इससे भारत भविष्य में ऐसे विमानों के रखरखाव और उन्नयन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सकेगा।
C-295 की खासियत
- C-295 अपनी श्रेणी में दुनिया के सबसे भरोसेमंद और बहुउपयोगी परिवहन विमानों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग (STOL) क्षमता। यानी यह बहुत छोटे रनवे, उबड़-खाबड़ और कच्चे मैदानों पर भी आसानी से उतर सकता है।
- यह विमान 9 टन से ज्यादा वजन या करीब 71 जवानों को एक साथ ले जाने में सक्षम है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल और दूरदराज के इलाके इसके लिए कोई चुनौती नहीं हैं। यही कारण है कि यह लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अंडमान-निकोबार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बेहद उपयोगी साबित होगा।
- इसके अलावा C-295 का इस्तेमाल पैराशूट जंपिंग, आपदा राहत, मेडिकल इमरजेंसी, खोज-बचाव अभियान और समुद्री गश्त जैसे कामों में भी किया जा सकता है। इसमें लगा आधुनिक ‘सेल्फ प्रोटेक्शन सूट’ दुश्मन की मिसाइलों और खतरों से बचाव करने में सक्षम है।
भारतीय वायुसेना को क्या फायदा होगा
C-295 के आने से भारतीय वायुसेना की सामरिक और लॉजिस्टिक क्षमता में बड़ा बदलाव आएगा। जिसमें सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में भारी सैन्य साजो-सामान और जवानों को बहुत कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। आपात स्थिति में एक पूरी टुकड़ी को तुरंत मोर्चे पर भेजना आसान होगा।
चूंकि विमान भारत में ही बन रहे हैं, इसलिए इनके स्पेयर पार्ट्स और मरम्मत के लिए विदेशों पर निर्भरता खत्म होगी। इससे विमानों का ‘डाउन-टाइम’ कम होगा और ऑपरेशनल उपलब्धता बढ़ेगी। यह लंबे समय में लागत को भी कम करेगा।
मेक इन इंडिया को मिली नई मजबूती
C-295 प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच का मजबूत उदाहरण है। यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि निर्माता भी बन रहा है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से रक्षा उत्पादन में नई गति आई है।
वडोदरा में बन रहा यह विमान भारत-स्पेन दोस्ती का प्रतीक तो है ही, साथ ही यह भारतीय वायुसेना के लिए एक नई उड़ान का संकेत भी है। आने वाले वर्षों में जब ‘मेड इन इंडिया’ C-295 भारतीय आसमान में उड़ान भरेगा, तो यह देश की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक ताकत का सशक्त संदेश देगा।






