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Brazil President India Visit: भारत-ब्राज़ील दोस्ती को नई रफ्तार,चीन के ‘लिथियम वर्चस्व’ को चुनौती देने की तैयारी
Current image: Brazil President Lula Visit India

Brazil President India Visit: भारत और ब्राज़ील के रिश्तों को नई रफ्तार देने के लिए ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18 से 22 फरवरी तक भारत के राजकीय दौरे पर हैं. नई दिल्ली में पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला के बीच अहम बैठक शुरू हो चुकी है, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स को लेकर बड़े समझौते की उम्मीद जताई जा रही है. यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ्स जैसी खनिज संपदा के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भर है.भारत और ब्राज़ील मिलकर इस निर्भरता को कम करने और सप्लाई चेन को विविध (Diversify) करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.

चीन के ‘लिथियम वर्चस्व’ को चुनौती देने की रणनीति

ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और AI सेक्टर के लिए लिथियम और रेयर अर्थ्स बेहद जरूरी हैं. फिलहाल इनकी वैश्विक सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है. कुछ,विशेषज्ञों के मुताबिक EV बैटरियों में इस्तेमाल होने वाले लिथियम और निकेल की सप्लाई पर चीन का बड़ा नियंत्रण है और रेयर अर्थ्स के प्रोसेसिंग में चीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.

भारत-ब्राज़ील साझेदारी का खास मकसद वैकल्पिक सप्लाई चेन को विकसित करना, खनिज संसाधनों की सीधी सप्लाई और प्रोसेसिंग में सहयोग और भविष्य की इंडस्ट्री के लिए स्ट्रैटेजिक रिज़र्व तैयार करना है.

पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला की बैठक क्यों है अहम?

पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला की बैठक को रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच संभावित समझौतों से भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति मिलेगी. ग्रीन एनर्जी और EV सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा.वहीं, AI और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी मिनरल्स की उपलब्धता बढ़ेगी.

हालाँकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर भी मुहर लग सकती है, जिससे निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को गति मिलेगी.

ब्राज़ील क्यों है भारत के लिए अहम साझेदार?

ब्राज़ील लैटिन अमेरिका का सबसे बड़ा देश है और लिथियम, आयरन ओरे, निकेल और रेयर अर्थ्स जैसे खनिजों से समृद्ध है. भारत के लिए ब्राज़ील इसलिए अहम है क्योंकि ब्राज़ील के पास प्राकृतिक संसाधनों की बहुतायत है. दोनों देश BRICS जैसे मंचों पर साथ काम करते हैं.
वहीं,कृषि, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में पहले से सहयोग है. अब क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग से रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

ग्रीन एनर्जी और EV सेक्टर को मिलेगा बूस्ट

भारत सरकार ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल को भविष्य की रीढ़ मान रही है. लेकिन बैटरियों के लिए जरूरी कच्चा माल महंगा और सीमित सप्लाई में है.
भारत-ब्राज़ील डील से EV बैटरियों के लिए लिथियम की सप्लाई स्थिर हो सकती है. जिससे,भारत में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी. वहीं, विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत का ग्रीन ट्रांजिशन तेज होगा और आयात पर निर्भरता घटेगी.

AI और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी कदम

AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में रेयर अर्थ्स का बड़ा रोल है. भारत-ब्राज़ील की साझेदारी से हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए रॉ मटीरियल की सप्लाई सुनिश्चित होगी.जिससे, मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर्स को बढ़ावा मिलेगा.
यह डील भारत को केवल कच्चा माल आयात करने वाला नहीं, बल्कि वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग हब बनाने की दिशा में ले जा सकती है.

व्यापार और निवेश में नए रास्ते खुलेंगे

इस दौरे के दौरान व्यापार समझौते पर मुहर लगने की संभावना है. इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, भारतीय कंपनियों को ब्राज़ील में निवेश के मौके मिलेंगे और ब्राज़ील की कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा सकती हैं. जानकारों का कहना है, कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा.

भू-राजनीतिक संदेश भी है अहम

यह साझेदारी केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संदेश भी देती है. दुनिया में बदलते शक्ति संतुलन के बीच भारत और ब्राज़ील जैसे उभरते देश यह दिखा रहे हैं कि वे किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना चाहते हैं और वैश्विक मंच पर मल्टी-पोलर वर्ल्ड ऑर्डर को मजबूत करना चाहते हैं.

समुद्री लॉजिस्टिक्स और ट्रेड रूट्स पर भी फोकस

भारत और ब्राज़ील के बीच खनिज व्यापार बढ़ने पर समुद्री लॉजिस्टिक्स और ट्रेड रूट्स का महत्व भी बढ़ेगा.दोनों देश बंदरगाहों, शिपिंग और वेयरहाउसिंग में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा कर सकते हैं. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत घटेगी और सप्लाई चेन ज्यादा कुशल बनेगी.

पर्यावरणीय मानकों और सस्टेनेबल माइनिंग पर सहमति

क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग से पर्यावरण पर असर पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ब्राज़ील के बीच होने वाले समझौते में सस्टेनेबल माइनिंग और पर्यावरण संरक्षण के मानकों को भी शामिल किया जा सकता है. इससे ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी.

इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग का असर भारत की घरेलू खनन नीति पर भी पड़ सकता है.सरकार घरेलू स्तर पर लिथियम और रेयर अर्थ्स की खोज और खनन को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां और निवेश ला सकती है.इससे भारत लंबे समय में आयात पर निर्भरता और कम कर सकेगा.

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