
Rajya Sabha Voting: देश की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण दिन है. संसद के ऊपरी सदन Rajya Sabha के लिए आज तीन राज्यों में मतदान हो रहा है. इन चुनावों में कुल 11 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जिनमें Bihar, Himachal Pradesh और Odisha शामिल हैं. इन राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. खास तौर पर बिहार की पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां छह उम्मीदवार मैदान में हैं.
भारतीय संसद में राज्यसभा का महत्व काफी बड़ा है. कई महत्वपूर्ण विधेयक तभी कानून बन पाते हैं जब उन्हें लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा की भी मंजूरी मिल जाती है.यदि किसी सरकार के पास राज्यसभा में पर्याप्त बहुमत नहीं होता तो उसे कानून पास कराने में मुश्किलें आ सकती हैं.
सुबह 9 बजे शुरू हुई वोटिंग
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया सुबह 9 बजे शुरू हुई और यह शाम 4 बजे तक चलेगी. इसके बाद शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू की जाएगी और देर शाम तक परिणाम घोषित होने की उम्मीद है.
इस बार देश के 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 सीटें खाली हो रही हैं. हालांकि इनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, इसलिए अब केवल 11 सीटों पर चुनाव कराया जा रहा है.
कई बड़े नेता निर्विरोध चुने गए
इस चुनाव में कई बड़े नेता बिना मुकाबले के राज्यसभा के लिए चुने गए हैं. इनमें प्रमुख नाम हैं Sharad Pawar, Ramdas Athawale, Abhishek Manu Singhvi, Vinod Tawde और Babul Supriyo.
इन नेताओं के निर्विरोध चुने जाने के बाद अब ध्यान बाकी सीटों पर होने वाले मुकाबलों पर है.
बिहार में पांच सीटों पर मतदान
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए मतदान कराया जा रहा है. इसके लिए राज्य विधानसभा परिसर में मतदान केंद्र बनाया गया है, जहां सभी विधायक अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे.
बिहार में पांच सीटों के लिए कुल 6 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इनमें शामिल हैं.
- Nitin Naveen – BJP
- Shivesh Kumar – BJP
- Nitish Kumar – JDU
- Ramnath Thakur – JDU
- Upendra Kushwaha – RLM
- Amrendra Dhari Singh – RJD.
पांच सीटों पर छह उम्मीदवार होने के कारण मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. वहीं कुछ, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की पांचवीं सीट पर मुकाबला काफी कड़ा हो सकता है. इस सीट पर दलों के बीच संख्या बल और रणनीति बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
क्रॉस वोटिंग पर भी रहती है नजर
राज्यसभा चुनावों में कई बार क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिलती है. यानी कुछ विधायक अपनी पार्टी के उम्मीदवार के बजाय किसी दूसरे दल के उम्मीदवार को वोट दे देते हैं. इसी वजह से राज्यसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति बनाते हैं. कई बार पार्टियां अपने विधायकों को एक साथ रखने के लिए बैठकें और प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित करती हैं.
हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में भी मुकाबला
हिमाचल प्रदेश में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं. यहां भी राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है. ओडिशा में भी आज राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है. यहां सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है.
राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?
राज्यसभा चुनाव सामान्य चुनावों की तरह नहीं होते.इन चुनावों में जनता सीधे वोट नहीं करती, बल्कि राज्य की विधानसभा के विधायक (MLA) मतदान करते हैं. राज्यसभा चुनाव प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के तहत कराए जाते हैं. इसमें विधायक अपने वोट के जरिए उम्मीदवारों को चुनते हैं और पार्टी के संख्या बल के आधार पर परिणाम तय होते हैं.
वहीं, राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसे भंग नहीं किया जा सकता.लेकिन हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं.
संसद में राज्यसभा की भूमिका
राज्यसभा भारत की संसद का ऊपरी सदन है और इसका महत्वपूर्ण काम कानून निर्माण में भाग लेना है. यह सदन कई विधेयकों पर चर्चा करता है और उन्हें पारित करने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है.
सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम
राज्यसभा में सीटों की संख्या बढ़ाना सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है. जहां सरकार अपनी नीतियों और विधेयकों को आसानी से पारित कराना चाहती है, वहीं विपक्ष राज्यसभा के जरिए सरकार को चुनौती देने और अपनी आवाज उठाने की कोशिश करता है.
राजनीतिक दलों के लिए अहम चुनाव
राज्यसभा चुनाव राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इन चुनावों के जरिए पार्टियां संसद में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश करती हैं. हालाँकि,आज शाम तक सभी सीटों के परिणाम सामने आ जाएंगे. इसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन दलों को राज्यसभा में कितना फायदा मिला है.
वहीं,राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों के परिणामों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है. संसद में किसी भी सरकार के लिए ऊपरी सदन में मजबूत संख्या होना काफी अहम माना जाता है.
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