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Board of Peace: अंतरराष्ट्रीय मंच पर ट्रंप का शांति प्रस्ताव,चीन-रूस को ‘Board of Peace’ में शामिल करने की बात
Current image: Board Of Peace

Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace)’ की पहली बैठक के दौरान वैश्विक राजनीति में हलचल मचा देने वाला बयान दिया है. ट्रंप ने कहा कि वे चीन और रूस को इस मंच में शामिल करना पसंद करेंगे और इन दोनों देशों को आधिकारिक निमंत्रण पहले ही भेजा जा चुका है.
ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनके “बहुत अच्छे संबंध” हैं और उन्हें उम्मीद है कि दोनों देश इस पहल में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे.इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस नई पहल की मंशा, विश्वसनीयता और असर को लेकर बहस तेज हो गई है.

क्या है ‘Board of Peace’?

Board of Peace की स्थापना ट्रंप प्रशासन की ओर से गाजा पट्टी में युद्धविराम, स्थिरता और पुनर्निर्माण के उद्देश्य से की गई है. इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 (2025) के तहत मान्यता प्राप्त है. ट्रंप ने इस मंच को संयुक्त राष्ट्र का एक “मजबूत विकल्प” बताया है. बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य उद्देश्य गाजा में स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करना, पुनर्निर्माण कार्यों को गति देना और जरूरत पड़ने पर अन्य वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करना है.

ट्रंप ने साफ किया कि वे अनिश्चितकाल तक इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे.उनके मुताबिक, यह मंच तेजी से फैसले लेने और ज़मीनी स्तर पर असर दिखाने में संयुक्त राष्ट्र से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है.

पहली बैठक में कौन-कौन देश हुए शामिल?

बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं कतर, सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन,संयुक्त अरब अमीरात (UAE), हंगरी, बेलारूस और कुछ अन्य देश.
इन देशों ने गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई.बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कैसे क्षेत्र में इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है.

फंडिंग का ऐलान, अमेरिका देगा 10 अरब डॉलर

बैठक के दौरान ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस को 10 अरब डॉलर का योगदान देगा.इसके अलावा,अन्य सदस्य देशों ने मिलकर करीब 7 अरब डॉलर की फंडिंग का वादा किया है. इसके साथ ही, गाजा में स्थिरता के लिए इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स के लिए कुछ देशों ने सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता भी जताई है. बैठक में यह सुझाव भी आया कि FIFA जैसे वैश्विक संगठनों से फंड जुटाने के विकल्पों पर विचार किया जाए, ताकि पुनर्निर्माण के लिए संसाधनों की कमी न हो.

चीन और रूस को न्योता, ट्रंप की रणनीति या राजनयिक दांव?

ट्रंप का चीन और रूस को न्योता देना केवल शांति की अपील नहीं, बल्कि एक राजनयिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि चीन और रूस को शामिल करने से बोर्ड की वैश्विक वैधता बढ़ सकती है. दोनों देशों की भागीदारी से गाजा संकट जैसे मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण सामने आ सकता है. यह पहल अमेरिका के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंध संतुलन साधने का जरिया भी हो सकती है.
हालांकि आलोचकों का कहना है कि जिन देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते कई मुद्दों पर तनावपूर्ण रहे हैं, उन्हें इस मंच पर लाना आसान नहीं होगा.

विवाद को लेकर,कई बड़े देशों ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बनाई दूरी

बोर्ड ऑफ पीस को लेकर विवाद भी खड़े हो गए हैं. जिससे कई प्रमुख पश्चिमी देशों और संस्थाओं ने इस मंच में शामिल होने से इनकार कर दिया है. इनमें शामिल हैं ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और यूरोपीय संघ (EU). इन देशों का मानना है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकती है और वैश्विक राजनयिक में समानांतर ढांचा खड़ा कर सकती है. कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या यह मंच वास्तव में निष्पक्ष मध्यस्थ बन पाएगा या यह किसी एक देश के प्रभाव में काम करेगा.

गाजा में क्या बदलेगा?

अगर Board of Peace अपने लक्ष्यों को जमीन पर उतार पाता है, तो गाजा में युद्धविराम को स्थायी रूप मिल सकता है. पुनर्निर्माण योजना तेज़ी से आगे बढ़ सकती हैं. आम नागरिकों को मानवीय सहायता अधिक संगठित तरीके से मिल सकती है.
हालांकि जमीनी सच्चाई यह भी है कि क्षेत्र में स्थिरता लाना आसान नहीं है. कई पक्षों के हित जुड़े होने की वजह से किसी एक मंच की पहल से हालात पूरी तरह बदल जाएं, यह कहना जल्दबाजी होगी.

वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

ट्रंप का यह कदम वैश्विक राजनीति में नई विभाजन की स्थिति पैदा कर सकता है. एक ओर वो देश हैं जो Board of Peace को तेज और प्रभावी मंच मान रहे हैं और दूसरी ओर वे देश हैं जो इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में खतरनाक प्रयोग बता रहे हैं.

वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर चीन और रूस इस मंच में शामिल होते हैं, तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन में नया अध्याय खोल सकता है.

दुनिया के आम नागरिकों के लिए शांति की किसी भी पहल का मतलब अंततः युद्ध से राहत, सुरक्षा और मानवीय सहायता से जुड़ा होता है. अगर Board of Peace वास्तव में गाजा जैसे क्षेत्रों में स्थिरता ला पाता है, तो यह लाखों लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.

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