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Romeo Movie Review: रोमांस और बदले का जबरदस्त मेल, शाहिद कपूर की मास एंट्री ने लूटी महफिल
Current image: O Romeo Review

Romeo Movie Review: फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज जब भी कोई फिल्म बनाते हैं, दर्शकों को कुछ अलग और हटकर देखने की उम्मीद होती है. उनकी फिल्मों में अक्सर डार्क रोमांस, बदला, दर्द और शेक्सपियरियन टच देखने को मिलता है. इसी उम्मीद के साथ उनकी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘ओ रोमियो’ 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म में शाहिद कपूर, तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, दिशा पटानी, तमन्ना भाटिया अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं. वहीं नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर विक्रांत मैसी स्पेशल अपियरेंस में दिखाई देते हैं.

रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर खूब चर्चा थी, कभी इसकी स्टारकास्ट को लेकर, तो कभी इसकी कहानी को लेकर.अब जब फिल्म थिएटर में आ चुकी है, तो सवाल यही है कि क्या ‘ओ रोमियो’ दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है या फिर यह भी विशाल भारद्वाज की कमजोर फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो जाती है?

फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही मचा बवाल

‘ओ रोमियो’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई थी. बताया गया कि फिल्म की कहानी हुसैन उस्तरा पर आधारित है. इसे लेकर उस्तरा की फैमिली ने आपत्ति जताई थी और दावा किया था कि फिल्म में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है.
हालांकि मेकर्स की तरफ से यह कहा गया कि फिल्म पूरी तरह फिक्शन है और किसी एक शख्स की कहानी पर आधारित नहीं है. विवादों के बीच फिल्म रिलीज हुई और अब दर्शक खुद तय कर रहे हैं कि इसमें कितना दम है.

ओ रोमियो की कहानी: रोमांस, बदला और दर्द का मेल

फिल्म की कहानी का केंद्र शाहिद कपूर का किरदार ‘रोमियो’ है. रोमियो एक सुपारी किलर है, जो बिंदास जिंदगी जीता है. उसे न किसी से लगाव है और न ही किसी रिश्ते की परवाह. लड़कियों की दीवानगी में उलझा रहने वाला रोमियो अपनी अलग ही दुनिया में जी रहा होता है. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब उसकी जिंदगी में तृप्ति डिमरी की एंट्री होती है. तृप्ति का किरदार उसकी दुनिया को पूरी तरह बदल देता है. रोमियो को पहली बार सच्चा प्यार होता है और यहीं से उसकी जिंदगी 360 डिग्री घूम जाती है.

जैसा कि मशहूर शेर है “आशिक़ का जनाज़ा है, धूम से निकले…”

कुछ ऐसा ही हाल इस रोमियो का भी होता है. प्यार में पड़ते ही वह ऐसे फैसले लेने लगता है, जो उसे बदले और दर्द के रास्ते पर ले जाते हैं. कहानी में कहीं-कहीं देवदास की झलक मिलती है और शाहिद कपूर के पिछले किरदारों की याद भी ताजा होती है.

शाहिद कपूर की परफॉर्मेंस और मास एंट्री ने लूटी महफिल

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है शाहिद कपूर की मास एंट्री और उनका स्टाइलिश अंदाज है. एक्शन सीन्स में शाहिद पूरे फॉर्म में नजर आते हैं. उनका बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और इंटेंस लुक स्क्रीन पर असर छोड़ता है. हालांकि, इमोशनल सीन्स में उनका अभिनय ठीक है, लेकिन कुछ जगहों पर ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने पुराने किरदारों की झलक ही दोहरा दी है. फिर भी फैंस के लिए शाहिद की एंट्री और एक्शन सीक्वेंस फिल्म को देखने का बड़ा कारण बन सकते हैं.

तृप्ति डिमरी: मजबूत किरदार, लेकिन सीमित स्क्रीन स्पेस

तृप्ति डिमरी का किरदार कहानी में अहम मोड़ लाता है. उन्होंने अपने हिस्से के सीन ईमानदारी से निभाए हैं. हालांकि, उनकी भूमिका और ज्यादा गहराई से लिखी जा सकती थी. कई जगह लगता है कि उनका किरदार कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया भर बनकर रह गया है.

नाना पाटेकर, अविनाश तिवारी और बाकी कलाकार

नाना पाटेकर हमेशा की तरह दमदार डायलॉग्स और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के साथ नजर आते हैं. वहीं,अविनाश तिवारी का किरदार कहानी में अहम है, लेकिन उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिलते. फरीदा जलाल अपनी मौजूदगी से भावनात्मक टच देती हैं. दिशा पटानी और तमन्ना भाटिया कैमियो जैसी भूमिकाओं में हैं, जो फिल्म में ग्लैमर जोड़ती हैं. वहीं, विक्रांत मैसी का स्पेशल अपियरेंस छोटा है, लेकिन प्रभाव छोड़ता है.

डायरेक्शन और कहानी: जहां उम्मीद थी, वहीं फिसली फिल्म

विशाल भारद्वाज से दर्शकों को हमेशा कुछ नया और दमदार मिलने की उम्मीद रहती है. लेकिन ‘ओ रोमियो’ के मामले में ऐसा लगता है कि डायरेक्शन में नयापन कम है. कहानी का आइडिया अच्छा हो सकता था, लेकिन उसे पर्दे पर उतारते वक्त फिल्म की लंबाई सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है. कई सीन खिंचे हुए लगते हैं और कहानी का टेंपो बीच-बीच में ढीला पड़ जाता है. रोमांस और बदले के बीच का संतुलन भी पूरी तरह जम नहीं पाता.नतीजा यह होता है कि फिल्म कुछ जगहों पर दिल छूने की कोशिश करती है, तो कुछ जगहों पर बोर करने लगती है.

म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर

विशाल भारद्वाज की फिल्मों में म्यूजिक हमेशा एक मजबूत पक्ष रहा है. ‘ओ रोमियो’ के गाने ठीक-ठाक हैं, लेकिन कोई भी गाना लंबे समय तक याद रहने वाला नहीं लगता.हालांकि बैकग्राउंड स्कोर कई सीन्स में माहौल बनाने में मदद करता है.

सिनेमैटोग्राफी और विजुअल्स

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है. डार्क टोन और लो-लाइट सीन फिल्म के मूड को सूट करते हैं. एक्शन सीक्वेंस अच्छे से शूट किए गए हैं, लेकिन कुछ जगह एडिटिंग और टाइट हो सकती थी.

दर्शकों और क्रिटिक्स की शुरुआती प्रतिक्रिया

फिल्म रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग शाहिद कपूर की परफॉर्मेंस की तारीफ कर रहे हैं. कुछ दर्शकों को कहानी लंबी और खिंची हुई लगी. विशाल भारद्वाज के फैंस को उनके पुराने लेवल की फिल्म की कमी महसूस हुई. वहीं, कुल मिलाकर, ‘ओ रोमियो’ को लेकर राय बंटी हुई है.

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