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Bharat Bandh Today: 30 करोड़ मजदूर हड़ताल पर, बैंक और परिवहन सेवाओं पर असर की आशंका
Current image: Bharat Bandh 2026

Bharat Bandh Today: आज देशभर में भारत बंद का असर देखने को मिल सकता है. ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर करीब 30 करोड़ मजदूरों के हड़ताल में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. यह हड़ताल साल 2025 में लागू हुए चार नए श्रम कानूनों के विरोध में की जा रही है. मजदूर संगठनों का आरोप है कि नए कानूनों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर हुए हैं और कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने की ज्यादा छूट मिल गई है.
ट्रेड यूनियन नेताओं के मुताबिक, इस बंद का असर बैंकिंग, बिजली, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जलापूर्ति जैसी जरूरी सेवाओं पर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार की ओर से अब तक किसी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रशासन ने कई राज्यों में सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को लेकर तैयारियां की हैं.

क्यों किया गया भारत बंद का ऐलान?

ट्रेड यूनियनों के एक समूह ने 9 जनवरी को इस देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया था. यूनियनों का कहना है कि यह विरोध “केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और देश-विरोधी, कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों” के खिलाफ है.
मजदूर संगठनों का आरोप है कि नए श्रम कानूनों से कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और छंटनी में ज्यादा आजादी मिल गई है, जिससे नौकरी की सुरक्षा कमजोर हो गई है. इसके अलावा, यूनियनों का कहना है कि इन कानूनों से ट्रेड यूनियनों की ताकत भी कम हुई है और मजदूरों की सामूहिक सौदेबाजी कमजोर पड़ी है.

चार नए श्रम कानूनों पर क्या है मजदूरों की आपत्ति?

2025 में लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों को सरकार ने श्रम सुधारों के तौर पर पेश किया था. सरकार का दावा है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

लेकिन ट्रेड यूनियनों का कहना है कि:

  • इन कानूनों से नौकरी की सुरक्षा कमजोर हुई है
  • कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने में ज्यादा छूट मिल गई है
  • ठेका और अस्थायी रोजगार को बढ़ावा मिलेगा
  • मजदूरों की शिकायतों और यूनियन गतिविधियों पर असर पड़ेगा
  • यूनियनों का आरोप है कि सुधारों के नाम पर मजदूरों के अधिकारों में कटौती की गई है, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर ज्यादा मार पड़ेगी.

पिछले साल की हड़ताल का अनुभव: 550 से ज्यादा जिलों पर पड़ा था असर

पिछले साल 9 जुलाई को भी इसी तरह की देशव्यापी हड़ताल हुई थी. उस समय करीब 25 करोड़ कामगारों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था और इसका असर देश के 550 से ज्यादा जिलों में देखने को मिला था. कई राज्यों में परिवहन सेवाएं ठप हो गई थीं, बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ था और सरकारी दफ्तरों में भी उपस्थिति कम रही थी. ट्रेड यूनियनों का दावा है कि पिछली हड़ताल के बाद भी सरकार ने मजदूरों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए, इसलिए एक बार फिर सड़क पर उतरना पड़ा.

बैंक, परिवहन और जरूरी सेवाओं पर कितना असर?

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि आज की देशव्यापी हड़ताल से बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जलापूर्ति की सेवाओं पर असर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी साफ किया कि सभी बैंक यूनियन इस हड़ताल में शामिल नहीं होंगी. बैंक कर्मचारियों के यूनाइटेड फ्रंट ने 27 जनवरी को पहले ही हड़ताल कर दी थी. हालांकि, AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी प्रमुख बैंक यूनियनें इस विरोध में हिस्सा लेंगी.
इसका मतलब यह है कि कुछ इलाकों में बैंक शाखाएं बंद रह सकती हैं या कामकाज सीमित रह सकता है. शहरों में बस, ऑटो और टैक्सी सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है.

श्रम आयुक्तों की बैठक के बावजूद हड़ताल पर अडिग यूनियनें

अमरजीत कौर के मुताबिक, अलग-अलग जिलों में श्रम आयुक्तों ने यूनियन नेताओं के साथ बैठकें बुलाई हैं और उनके मुद्दों पर बातचीत करने की कोशिश की है. हालांकि, यूनियन नेताओं का कहना है कि बातचीत के बावजूद 12 फरवरी का आंदोलन फोरम की योजना के मुताबिक ही चलेगा. मजदूर संगठनों का मानना है कि जब तक सरकार ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जरूरी है.

30 करोड़ मजदूरों के शामिल होने का दावा

ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों का दावा है कि इस बार हड़ताल में करीब 30 करोड़ श्रमिक हिस्सा ले सकते हैं. इसमें संगठित और असंगठित, दोनों क्षेत्रों के मजदूर शामिल होने की संभावना है. यूनियनों को कई किसान संगठनों और छात्र संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है. हालांकि, असली संख्या का अंदाजा दिन के अंत में ही लग पाएगा, लेकिन इतना तय है कि यह आंदोलन देश के सबसे बड़े श्रमिक आंदोलनों में से एक बन सकता है.

आम लोगों को क्या परेशानी हो सकती है?

भारत बंद का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। आज के बंद के दौरान:

  • बैंक में जरूरी काम अटक सकते हैं
  • बस, ट्रेन और लोकल परिवहन में देरी या कमी हो सकती है
  • बिजली और जलापूर्ति कुछ इलाकों में प्रभावित हो सकती है
  • स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों में उपस्थिति कम रह सकती है
  • प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जरूरी काम के लिए पहले से तैयारी रखें और अनावश्यक यात्रा से बचें.

सरकार का रुख और आगे की राह

सरकार का कहना है कि श्रम सुधारों का मकसद निवेश बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है. सरकार यह भी दावा करती है कि नए कानूनों में मजदूरों के हितों की अनदेखी नहीं की गई है. हालांकि, ट्रेड यूनियनों की नाराजगी से साफ है कि सरकार और मजदूर संगठनों के बीच संवाद की कमी है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसे टकराव से अर्थव्यवस्था और औद्योगिक माहौल पर असर पड़ सकता है. इसलिए दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए.

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