
Shabana Mahmood: ब्रिटेन की राजनीति इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल से गुजर रही है। दरअसल, एपस्टीन विवाद से जुड़े खुलासों और लेबर पार्टी के अंदर बढ़ते विवाद के कारण प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बता दें कि, उनके इस्तीफे को लेकर अभी ऑफिशियल तौर से कुछ भी फाइनल नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में नए संभावित प्रधानमंत्री के नामों पर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इन नामों में गृह मंत्री शबाना महमूद सबसे प्रमुख दावेदारों में गिनी जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, अगर शबाना महमूद प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह ब्रिटेन के इतिहास में पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री होंगी। साथ ही, यह न केवल ब्रिटेन बल्कि पूरे यूरोप में प्रतिनिधित्व और विविधता के लिहाज से एक ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा। एशियाई और मुस्लिम समुदाय के लिए भी यह बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
स्टॉर्मर सरकार पर संकट क्यों?
हाल के दिनों में एपस्टीन फाइल्स और पीटर मैंडेलसन से जुड़े विवादों ने कीर स्टॉर्मर की सरकार को घेर लिया है। बताया जा रहा कि, उनके करीबी सहयोगियों के लगातार इस्तीफों ने राजनीतिक दबाव को और बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन ने पद छोड़ दिया, जबकि इससे पहले चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी भी इस्तीफा दे चुके हैं।
वहीं,लेबर पार्टी के भीतर असंतोष, गिरती लोकप्रियता और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है। इसी संभावित बदलाव के केंद्र में शबाना महमूद का नाम उभरकर सामने आया है।
कौन हैं शबाना महमूद?
दरअसल,शबाना महमूद लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता और वर्तमान में ब्रिटेन की होम सेक्रेटरी यानी गृह मंत्री हैं। उन्हें अनुभवी, स्थिर और प्रशासनिक रूप से मजबूत नेता माना जाता है। वह प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर की करीबी सहयोगियों में भी शामिल रही हैं। बता दें कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि प्रवासी रही है। उनका संबंध पाक अधिकृत कश्मीर के मीरपुर क्षेत्र से बताया जाता है। एक इमिग्रेंट परिवार से आने के बावजूद उन्होंने इमिग्रेशन नीति पर सख्त रुख अपनाया है, जिससे उन्हें लेबर पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े का समर्थन भी मिला है।
इमिग्रेशन पर सख्त नीति
होम सेक्रेटरी के रूप में शबाना महमूद ने अवैध इमिग्रेशन पर कड़ी कार्रवाई, बॉर्डर कंट्रोल मजबूत करने और स्थायी निवास की योग्यता अवधि को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल करने जैसे फैसलों को आगे बढ़ाया। यही कारण है कि उन्हें इमिग्रेशन मुद्दे पर “हार्डलाइनर” नेता माना जाता है। राजनीतिक के मुताबिक, उनका यह रुख उन्हें व्यापक मतदाताओं के बीच स्वीकार्य बनाता है, खासकर उन लोगों के बीच जो सख्त सीमा नियंत्रण की मांग करते हैं।
न्याय मंत्री के रूप में अनुभव
गृह मंत्री बनने से पहले शबाना महमूद न्याय मंत्री के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने जेल सुधार, सजा व्यवस्था और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर काम किया। उनकी प्रशासनिक समझ और कानूनी पृष्ठभूमि को उनकी बड़ी ताकत माना जाता है।
बता दें कि वे पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को अपनी प्रेरणा मानती हैं, जो उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
पीएम पद की दौड़ में और कौन?
ब्रिटेन में संभावित प्रधानमंत्री पद की चर्चा केवल शबाना महमूद तक सीमित नहीं है। लेबर पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। एंजेला रेनर, जो पहले डिप्टी प्राइम मिनिस्टर रह चुकी हैं और पार्टी की डिप्टी लीडर भी रही हैं, मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। उनकी पार्टी संगठन पर अच्छी पकड़ और जमीनी लोकप्रियता उन्हें महत्वपूर्ण बनाती है।
जिसमें वेस स्ट्रीटिंग, वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री, अपनी प्रभावी संवाद शैली और मीडिया में मजबूत छवि के कारण चर्चा में हैं। वहीं ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड भी एक अनुभवी नेता हैं, हालांकि संसद सदस्य न होने को उनकी कमजोरी माना जाता है।
ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम, जो पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, भी संभावित विकल्पों में शामिल हैं।
क्या बदल सकती है ब्रिटेन की राजनीति?
अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है और शबाना महमूद प्रधानमंत्री बनती हैं, तो यह ब्रिटेन की राजनीति में कई स्तरों पर बदलाव का संकेत होगा। एक मुस्लिम महिला का देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचना सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक होगा, वहीं उनकी सख्त नीतियां प्रशासनिक निरंतरता का संदेश दे सकती हैं। फिलहाल सबकी नजर कीर स्टॉर्मर के अगले कदम पर टिकी है। इस्तीफा होता है या नहीं, यह आने वाले समय में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि ब्रिटेन की राजनीति एक अहम मोड़ पर खड़ी है और शबाना महमूद का नाम इस बदलाव की सबसे बड़ी चर्चा बन चुका है।
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