
India Malaysia Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को भारत और मलेशिया के बीच संबंधों पर बात करते हुए कहा है कि, दोनों देशों को तमिल भाषा के प्रति साझा स्नेह मजबूती से जोड़ता है। साथी ही, मलेशिया में शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में तमिल भाषा की मजबूत और जीवंत उपस्थिति दिखाई देती है, जो दोनों देशों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक निकटता को दर्शाती है।
जानकारी के लिए बता दें कि मलेशिया में भारतीय मूल के लगभग 30 लाख लोग रहते हैं, जो दुनिया में भारतीय प्रवासियों का दूसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता है। वहीं, इनमें से अधिकतर लोग तमिल मूल के हैं, जो यही समुदाय भारत और मलेशिया के रिश्तों को सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तर पर मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।साथ ही, तमिल भाषा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि साझा विरासत, परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी है। इस कारण भारत और मलेशिया के लोगों के बीच स्वाभाविक आत्मीयता दिखाई देती है। जिसपर प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच हुआ नया ऑडियो-विजुअल समझौता फिल्मों, संगीत और खास तौर पर तमिल सिनेमा के माध्यम से लोगों के दिलों को और करीब लाएगा।
एमजीआर के प्रति साझा सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, भारत के कई लोगों की तरह, महान अभिनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) के बड़े प्रशंसक हैं। यह सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों देशों के बीच भावनात्मक संबंधों को और मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में आयोजित दोपहर के भोजन के दौरान तमिल फिल्म नालाई नमाधे का एक प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत किया गया। जिसमें यह फिल्म 1975 में रिलीज हुई थी और एमजीआर की लोकप्रिय फिल्मों में शामिल रही है। वहीं, इस अवसर को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उनके मित्र प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा आयोजित भोज में नालाई नमाधे का गीत सुनना विशेष अनुभव रहा। साथ ही, एमजी रामचंद्रन सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के प्रभावशाली नेता भी थे। उन्होंने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) पार्टी की स्थापना की और राज्य के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1987 में उनके निधन के बाद भी वे लाखों लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
भारतीय प्रवासी बने मजबूत सेतु
प्रधानमंत्री मोदी ने सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय प्रवासी भारत और मलेशिया के बीच एक मजबूत सेतु की तरह काम करते हैं। साथ ही, इससे इतिहास, संस्कृति और परंपरा से प्रेरित होकर भारत ने मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवल्लुवर चेयर की स्थापना की है। अब साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने के लिए एक तिरुवल्लुवर केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाषा और संस्कृति लोगों को जोड़ने की सबसे बड़ी ताकत होती है। जिसमें तमिल भाषा ने सदियों से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क बनाए रखा है। मलेशिया में तमिल स्कूल, मीडिया संस्थान और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए हैं।
सांस्कृतिक सहयोग से बढ़ेंगे संबंध
प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि भारत और मलेशिया के बीच बढ़ता सांस्कृतिक सहयोग आने वाले समय में शिक्षा, कला, सिनेमा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगा। तमिल सिनेमा और संगीत दोनों देशों के युवाओं को जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
जिसमें एक्सपर्ट्स कहना है कि सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) आज के समय में देशों के रिश्तों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है। भारत और मलेशिया के बीच तमिल भाषा, परंपरा और प्रवासी समुदाय इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भविष्य की साझेदारी पर भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-मलेशिया संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि लोगों के दिलों से जुड़े रिश्ते हैं। साझा इतिहास, भाषा, भोजन, त्योहार और पारिवारिक मूल्यों ने दोनों देशों को करीब लाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और मजबूत होगी तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा देगी।
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