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Mohandas Bhagwat: स्वयंसेवक लाठी चलाते हैं,लेकिन RSS अर्धसैनिक बल नहीं है
Current image: Mohandas Bhagwat

Mohandas Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने आज शनिवार को मुंबई में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संघ किसी के खिलाफ काम नहीं करता और न ही सत्ता या लोकप्रियता प्राप्त करना उसका उद्देश्य है। साथ ही, RSS को अर्धसैनिक बल के रूप में देखना गलत है, भले ही संघ के स्वयंसेवक नियमित पथ संचलन करते हों और लाठी चलाने का अभ्यास करते हों। बता दें कि, यह गतिविधियां शारीरिक और मानसिक अनुशासन के लिए होती हैं, न कि किसी प्रकार की सैन्य तैयारी के लिए। वहीं, भागवत ने अपने संबोधन में देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उभरी विचारधाराओं का भी उल्लेख किया है। जिसमें उन्होंने राजा राम मोहन राय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे समाज सुधारकों और नेताओं के योगदान को याद करते हुए कहा है कि इन सभी ने समाज को दिशा देने का काफी प्रयास किया था। साथ ही, उन्होंने चिंता भी जताई कि वर्तमान समय में समाज को सही दिशा देने और अनुकूल वातावरण बनाने का कार्य पर्याप्त रूप से नहीं हो रहा है।

जिसमें उनका यह भी कहना है कि, RSS किसी घटना की प्रतिक्रिया में काम नहीं करता, बल्कि देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन देने और उन्हें मजबूत करने का काम करता है। दरअसल, सीधे तौर पर राजनीति में शामिल नहीं है, हालांकि संघ से जुड़े कुछ लोग व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक जीवन में सक्रिय हो सकते हैं।

RSS की स्थापना से पहले की परिस्थितियों का जिक्र

मोहन भागवत ने वर्ष 1925 मे RSS की स्थापना से पहले देश की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा है कि, अंग्रेजों ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक सुरक्षा वाल्व के रूप में स्थापित किया था, लेकिन भारतीयों ने उसे स्वतंत्रता संग्राम का सशक्त माध्यम बना दिया। वहीं, उस दौर में कई विचारधाराएं और आंदोलन समानांतर रूप से चल रहे थे, जिन्होंने देश को स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ाया। भागवत ने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का भी उल्लेख किया। जिसमें उनका कहना है कि, हेडगेवार का बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता और मात्र 13 वर्ष की आयु में प्लेग के कारण उनके माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

हेडगेवार के संघर्ष और क्रांतिकारी दौर

संघ प्रमुख ने बताया कि हेडगेवार ने अपने छात्र जीवन से ही देशभक्ति से जुड़े आंदोलनों में भाग लेना शुरू कर दिया था। स्कूल के दिनों में उन्होंने वंदे मातरम् आंदोलन में हिस्सा लिया। मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद नागपुर के कुछ लोगों ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजने में आर्थिक मदद की। साथ ही, कोलकाता में पढ़ाई के दौरान हेडगेवार का संपर्क क्रांतिकारी समूहों से हुआ। भागवत ने उस समय की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हेडगेवार ने कोकेन नाम के कोडनेम से काम किया, जो कोकेनचंद्र नामक व्यक्ति से प्रेरित था। उन्होंने बताया कि एक बार पुलिस की टीम कोकेनचंद्र को गिरफ्तार करने आई, लेकिन गलतफहमी में हेडगेवार को ही हिरासत में ले लिया गया। यह घटना रास बिहारी बोस की एक पुस्तक में भी दर्ज बताई जाती है।

संघ के उद्देश्य पर जोर

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में दोहराया कि RSS का मूल उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और राष्ट्र निर्माण के कार्यों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि संघ किसी भी प्रकार की हिंसा, वैमनस्य या सत्ता की राजनीति से दूर रहकर समाज सेवा और संगठन निर्माण पर ध्यान देता है।साथ ही, स्वयंसेवकों द्वारा किया जाने वाला शारीरिक प्रशिक्षण अनुशासन, आत्मविश्वास और सामूहिकता की भावना विकसित करने के लिए होता है। इसे किसी सैन्य या अर्धसैनिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अंत में भागवत ने लोगों से समाज में एकता, सहयोग और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का कार्य केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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