
Sankashti Chaturthi 2026: आज यानि 5 फ़रवरी 2026 को हिन्दुओं के प्रिय भगवान गणेश की एक महत्वपूर्ण उपासना रात में से एक द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) मनाई जा रही है. यह दिन खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो कठिनाइयों से मुक्ति और बुद्धि-शक्ति की वृद्धि चाहते हैं. इस बार की संकष्टी का नाम ‘द्विजप्रिय’ है. यानी वह रूप जो विद्वानों और तपस्वियों को प्रिय माना जाता है.
क्या है संकष्टी चतुर्थी ?
संकष्टी चतुर्थी हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है. इसे ‘संकट हरने वाला व्रत’ भी कहा जाता है क्योंकि श्रद्धा से परम्परागत व्रत व पूजा करने पर कहते हैं कि जीवन की बाधाएं कम होती हैं,और गणपति का आशीर्वाद मिलता है. भक्त सुबह से व्रत रखते हैं और रात में चन्द्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत पूरा कर पारण करते है. यह व्रत बुद्धि, अध्यात्म और घर-परिवार की शांति के लिए भी विशेष माना जाता है.
आज की तिथि और महत्वपूर्ण समय
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ उदय-तिथि यानि 5 फ़रवरी 2026 की सुबह 12:09 AM से है. वहीं तिथि की समापन 6 फ़रवरी 2026 की रात 12:22 AM तक है और चंद्र दर्शन का शुभ मुर्हत रात के लगभग 9:14 बजे है. हालाँकि आप चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण कर सकते है. वही, संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ उत्तम मुहूर्त सुबह 07:07 से 08:29 के बीच है. यह समय विशेष रूप से पूजा-आरम्भ के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है.
संकष्टी चतुर्थी व्रत कब और कैसे रखें:
सुबह की तैयारी
- सुबह समय से उठें, स्वच्छ स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें.
- पूजा स्थल को साफ करें; लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ क्यूंकि लाल रंग गणेश का प्रिय माना जाता है.
- पूजा-स्थल पर गणेश की प्रतिमा या चित्र रखें. यदि प्रतिमा न हो तो गणेश के चित्र पर ही श्रद्धा से ध्यान कर सकते हैं.
प्रतिदिन पूजा की विधि:
- दीपक, धूप, अक्षत, फूल और दूर्वा (तीन पत्तियाँ) रखें.
- गणेश को जल, दुर्गन्धित चंदन और रोली से अभिषेक करें.
- नारियल, फल, मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ, मोदक पारंपरिक भोग है.
- संकष्टी व्रत कथा पढ़ें या सुनें, यदि कथा उपलब्ध न हो तो गणेश मंत्र (जैसे “ॐ गण गणपति गणपतये नमः”) का जाप कर सकते हैं.
- शाम को या दिन के शुभ मुहूर्त में गणेश आरती करें और सायं-शाम चंद्रोदय से पहले पूजा को व्यवस्थित रखें ताकि चंद्र दर्शन होते ही व्रत का पारण किया जा सके.
चंद्र दर्शन और पारण
चंद्र दिखाई देने पर चंद्रोदय व्रत का पारण करें.पारण में हल्का-फुल्का भोजन जैसे फल, खिचड़ी या वेज व्यंजन लें. ध्यान रखें की यदि चंद्र दिखाई न दे तो अगले दिन पंचांग या मंदिर के निर्देशनानुसार पारण करें. कई स्थानों पर चंद्रदर्शन अनिवार्य माना जाता है.
संकष्टी चतुर्थी की कथा
परंपरा के अनुसार, एक बार भगवान गजानन यानि गणेश ने अपनी भक्ति और बुद्धि से अनेक भक्तों की कठिनाइयाँ दूर कीं. कथा में बताया जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ संकष्टी व्रत करता है और कथा का पाठ करता है, भगवान उसकी बाधाओं को दूर करते हैं. इसी कारण यह व्रत ‘संकट’ हटाने वाला माना गया. इसलिए इसे संकष्टी व्रत कहा गया है.
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान क्या खाएँ और क्या न खाएँ
अनाज व दाल से परहेज़ करे. हालाँकि, कई लोग पूरी तरह फास्ट रखते हैं और कुछ लोग फलाहार या साबूदाना आधारित खाने को अपनाते हैं.
- पानी, दूध, फल, शहद, सूखे मेवे आदि फास्ट में लिए जा सकते हैं.
- रात में चंद्र दर्शन से पहले भोजन न करें, पारण चांद देखने के बाद ही करें.
- व्रत के दौरान शराब, धूम्रपान लेना , झूठ बोलना और क्रोध करने से बचे.
विशेष मंत्र और आरती
- मुख्य मंत्र जाप: “ॐ गं गणपतये नमः”108 बार या जितना संभव हो उतनी बार जप करें.
- आरती के अंत में: “जय देव भय हरो, विघ्न विनाशन” परम्परागत आरती पंक्तियाँ पढ़ें या गायें.
संकष्टी चतुर्थी का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व
यह व्रत बुद्धि, शिक्षा और मंत्रणा-क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष माना जाता है. इसलिए छात्र और विद्वान इसका पालन करते हैं. हालाँकि, पारिवारिक संकट, आर्थिक तथा मानसिक उलझनों से राहत पाने के लिये लोग संकष्टी व्रत रखते हैं. धार्मिक आयोजनों में सामूहिक पूजा से सामुदायिक जुड़ाव और मन की शांति मिलती है.
स्थानीय और आधुनिक सुझाव
अगर आप पहली बार संकष्टी चतुर्थी व्रत कर रहे हैं,तो मंदिर की ओर से दी गई सूचना और अपने पारिवारिक बुजुर्गों की सलाह लें.
यदि आप शहर में रहते हैं और चंद्र दर्शन का समय रात में देर से है, तो आरती-पूजा को शाम के शुभ मुहूर्त में कर लें और चंद्र दर्शन के समय पारण करें.
बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग यदि व्रत न रख सकें तो घर पर पूजा कर आशीर्वाद लें; व्रत का उद्देश्य शारीरिक शमिता ही नहीं बल्कि श्रद्धा है.
व्रत न रख पाएं तो क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्य या मजबूरी के कारण पूरा व्रत नहीं रख पाता है, तो भी वह सिर्फ संकष्टी चतुर्थी की पूजा कर सकते है. गणेश मंत्र का जाप और दान-पुण्य करके भी पुण्य फल प्राप्त कर सकता है.






