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Kolkata Earthquake: पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भूकंप से हिली ज़मीन, सीमापार बांग्लादेश तक महसूस हुए झटके
Current image: Earthquake in kolkata

Kolkata Earthquake: पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भूकंप से हिली ज़मीन, सीमापार बांग्लादेश तक महसूस हुए झटकेपश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार रात अचानक धरती कांप उठी. कुछ सेकंड के लिए आए तेज झटकों से लोग घबरा गए और कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. भूकंप का असर सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिम बंगाल के कई जिलों और सीमापार बांग्लादेश के कई हिस्सों में भी इसके झटके महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) म्यांमार में बताया जा रहा है. यूरोपीय-मेडिटेरेनियन सिस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक, यह भूकंप म्यांमार के अकयाब से करीब 70 किलोमीटर पूर्व दिशा में आया. रात के करीब 9:04 बजे इस प्राकृतिक घटना को रिकॉर्ड किया गया. वहीं,भूकंप की तीव्रता 5.9 से 6 के बीच मापी गई है.
फिलहाल किसी भी तरह की जीवन-संपत्ति के नुकसान की कोई आधिकारिक खबर सामने नहीं आई है, लेकिन झटकों की वजह से लोगों में दहशत का माहौल जरूर बन गया.

कोलकाता में कैसे महसूस हुए झटके?

मंगलवार रात जैसे ही भूकंप आया, कोलकाता के कई इलाकों में लोगों को झटके महसूस हुए. ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों ने बताया कि उनके घरों के पंखे और लाइटें हिलने लगीं. कुछ जगहों पर खिड़कियों के शीशे भी हल्के से कंपन करते दिखे. दफ्तरों और अपार्टमेंट्स में मौजूद लोगों ने कुछ सेकंड के लिए कंपन महसूस किया. कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी ने बिल्डिंग को जोर से हिला दिया हो. कोलकाता के अलावा हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पश्चिम बंगाल के कुछ अन्य हिस्सों में भी भूकंप के झटकों की खबरें सामने आईं. सीमावर्ती इलाकों के लोग भी डर गए और सावधानी के तौर पर घरों से बाहर निकल आए.

बांग्लादेश तक महसूस किए गए झटके

इस भूकंप का असर भारत तक ही सीमित नहीं रहा. म्यांमार में आए इस भूकंप के झटके बांग्लादेश के कई हिस्सों में भी महसूस किए गए. ढाका और आसपास के इलाकों से लोगों ने कंपन महसूस होने की जानकारी दी. हालांकि बांग्लादेश और भारत, दोनों देशों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है. लेकिन इस तरह के झटकों ने एक बार फिर लोगों को यह एहसास दिला दिया कि भूकंप किसी भी समय और कहीं भी आ सकता है.

म्यांमार में 71 घंटों में तीसरा भूकंप

EMSC के अनुसार, म्यांमार में पिछले 71 घंटों में यह तीसरा भूकंप था. भूकंप का एपिसेंटर म्यांमार के सिदोक्तया इलाके के पास पाया गया, जो म्यांमार से करीब 30 किलोमीटर दूर है. लगातार भूकंप आना इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को दर्शाता है. म्यांमार, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत का इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. यही वजह है कि यहां हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप समय-समय पर आते रहते हैं.

प्रशासन अलर्ट मोड में, फिलहाल कोई नुकसान नहीं

भूकंप के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड में आ गए हैं. राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है. कोलकाता नगर निगम और राज्य आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं. किसी भी संकट की स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां की गई हैं. प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें.

एक दिन पहले भारत के इन राज्यों में आया था भूकंप

साल 2026 में भारत के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं. एक दिन पहले यानी सोमवार को जम्मू-कश्मीर में 4.8 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था. यह भूकंप 2 फरवरी 2026 की सुबह 5:35 बजे दर्ज किया गया. इसका केंद्र बडगाम जिले की धरती से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया. जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में लोगों ने झटके महसूस किए थे, हालांकि वहां भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई.वहीं, इसी दिन केंद्र शासित प्रदेश अंडमान-निकोबार में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. सुबह 3:31 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई थी. अंडमान-निकोबार क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यहां भूकंप की घटनाएं पहले भी होती रही हैं.

11 महीने पहले भी कांपी थी बंगाल की धरती

पश्चिम बंगाल में यह पहली बार नहीं है जब भूकंप के झटके महसूस किए गए हों. इससे करीब 11 महीने पहले, 25 फरवरी 2025 को भी पश्चिम बंगाल में भूकंप आया था. तब इसकी तीव्रता 5.1 मापी गई थी. उस भूकंप का केंद्र बंगाल की खाड़ी में करीब 91 किलोमीटर की दूरी पर था. इसके एक महीने पहले, 8 जनवरी 2025 को भी पश्चिम बंगाल में भूकंप दर्ज किया गया था. हालांकि इन दोनों घटनाओं में भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई थी, लेकिन लोगों में डर जरूर फैल गया था.

क्यों आते हैं भूकंप? क्या है इसकी वजह?

भूकंप धरती की अंदरूनी हलचल का नतीजा होते हैं. हमारी पृथ्वी की ऊपरी सतह कई बड़े-बड़े टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है. पूरी दुनिया में करीब 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार धीरे-धीरे अपनी जगह बदलती रहती हैं. जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं या किसी फॉल्ट लाइन यानि दरार पर फंस जाती हैं, तो उनके बीच रगड़ पैदा होता है. इस रगड़ से अंदर ही अंदर ऊर्जा जमा होती रहती है.
जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो धरती कांप उठती है. इसी को हम भूकंप कहते हैं. जितनी ज्यादा ऊर्जा निकलती है, भूकंप की तीव्रता उतनी ही ज्यादा होती है. भारत, म्यांमार और बांग्लादेश का इलाका टेक्टोनिक प्लेट्स के एक्टिव जोन के पास आता है, इसलिए यहां भूकंप आने की संभावना ज्यादा रहती है.

भूकंप के दौरान क्या करें और क्या न करें?

भूकंप अचानक आता है, इसलिए पहले से सतर्क रहना बहुत जरूरी है. कुछ आसान सावधानियां आपकी जान बचा सकती हैं:

भूकंप के दौरान क्या करें?

  • अगर आप घर के अंदर हैं, तो किसी मजबूत मेज या बेड के नीचे बैठ जाएं
  • खिड़की, शीशे और भारी सामान से दूर रहें
  • लिफ्ट का इस्तेमाल न करें
  • खुले मैदान की ओर जाने की कोशिश करें
  • सिर और गर्दन को हाथों से ढककर रखें

क्या न करें?

  • घबराकर इधर-उधर न भागें
  • बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े न हों
  • अफवाहों पर भरोसा न करें
  • बिना जरूरत के फोन कॉल करके नेटवर्क ब्लॉक न करें

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