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Hypersonic Missile: भारत बना रहा है, शक्तिशाली हाइपरसोनिक मिसाइल, अब थर-थर कांपेगा पाकिस्तान
Current image: Hypersonic Missile

Hypersonic Missile: भारत की मिसाइल शमता अब एक नए रूप में प्रवेश करने जा रही है। वहीं, DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने एक नई लॉन्ग रेंज एंटी–शिप हाइपरसेनिक क्रूज मिसाइल (LRASHM) का विकास किया है, जो ब्रह्मोस मिसाइल से कई गुना अधिक तेज और शक्तिशाली होगी।

जानकारी के लिए बता दें कि न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान डॉ कामत ने कहा है कि LRAShM मिसाइल के दो विकासात्मक परीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं और तीसरे परीक्षण की तैयारी चल रही है। साथ ही, इन प्रकिया को पूरा होने बाद इसे उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। उसके बाद ही यह मिसाइल को भारतीय सेना में शामिल होगी और तभी यह विश्वासध्यक साबित होगी।

ब्राह्मोस से अधिक क्षमतावान

बता दें कि, जब LRAShM मिसाइल की तुलना ब्रह्मोस मिसाइल से करने के बारे में पूछा गया, तो डॉ. कामत ने बताया कि यह नई मिसाइल ब्रह्मोस से कहीं अधिक तेज गति से यात्रा करेगी और इसकी मारक (रेंज) भी बहुत बड़ी होगी। साथ ही, यह निश्चित रूप से हमारी सेनाओं के शस्त्रागार में बड़ा योगदान देगी।

अलग-अलग संस्करणों का विकास

डीआरडीओ LRAShM मिसाइल के विभिन्न संस्करणों पर भी काम कर रहा है। वहीं, डॉ. कामत ने बताया कि जमीनी हमला (लैंड अटैक) संस्करण का विकास प्रारंभिक चरण में है। इसके अलावा, हवाई प्रक्षेपण (एयर लॉन्च) संस्करण भी विकसित किया जाएगा, लेकिन यह जहाज-रोधी और जमीनी संस्करण के परीक्षणों के बाद ही शुरू होगा।बताया जा रहा है कि, इस मिसाइल को हाल ही में गणतंत्र दिवस परेड में भी प्रदर्शित किया गया था। डॉ. कामत ने कहा कि इस मिसाइल का निर्यात भी संभव है, जिससे भारत की रक्षा तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

नई तकनीकों पर जोर

डीआरडीओ के प्रमुख का कहना है कि, LRAShM मिसाइल के अलावा भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन एयरो-इंजन और मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (UCAVs) के विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। वहीं इसके अलावा, क्वांटम तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और उन्नत सामग्रियों जैसे क्षेत्र भी विकास की योजना में शामिल हैं। डॉ. कामत ने कहा कि, भविष्य में ये तकनीकें हर नई प्रणाली में शामिल होंगी और हमारी रक्षा ताकत को और मजबूत बनाएंगी।

रक्षा बजट पर संतोष

बता दें कि, आम बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए आवंटन पर डॉ. कामत ने अपनी बात रखी थी। रक्षा क्षेत्र के लिए यह बजट बहुत सकारात्मक है। स्वदेशी प्रणालियों के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 1.39 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि कुल बजट अब 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। साथ ही, डीआरडीओ के पूंजीगत बजट में 15.6% की वृद्धि हुई है, जो नई तकनीकों और स्वदेशी प्रणालियों के विकास में मदद करेगी।

भविष्य की तैयारी

LRAShM मिसाइल के विकास के साथ भारत अपनी रक्षा क्षमता को और आधुनिक बना रहा है। साथ ही, यह मिसाइल न केवल तेज और मारक क्षमता में बेहतर होगी, बल्कि यह भारतीय सेना के लिए एक गेम-चेंजर भी साबित होगी।वहीं, इस नई प्रणाली की मदद से भारत अपने पड़ोसी देशों की किसी भी संभावित धमकी का सामना करने में सक्षम होगा। वहीं, डीआरडीओ की यह पहल यह दर्शाती है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। LRAShM मिसाइल के साथ ही जमीनी, हवाई और जहाज-रोधी संस्करणों के विकास से भारत अपनी मिसाइल तकनीक में एक नई क्रांति लाने जा रहा है। वहीं, भविष्य में भारतीय सेना को भी नई तकनीकों और उन्नत मिसाइल प्रणालियों के माध्यम से और भी ज्यादा ताकत मिलेगी। यह अहम मिसाइल प्रणाली न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की रक्षा उद्योग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी प्रगति को भी मजबूत करेगी।

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