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बांग्लादेश में फिर बढ़ी हिंसा ,शटर बंद कर के हिन्दू युवक को ज़िंदा जलाया
Current image: बांग्लादेश में हिन्दू युवक को ज़िंदा जलाया

Bangladesh Violence: बांग्लादेश में एक बार फिर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा ने मानवता को झंझोर कर रख दिया है.चुनावी माहौल के बीच देश में कट्टरपंथ और धार्मिक असहनशीलता खुलकर सामने आने लगी है. हालही हुए घटनाओं ने यह साफ कर दिया है, कि वहां रहने वाले माइनॉरिटी, विशेषकर हिंदू समुदाय, आज भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है.

यह ताजा मामला नरसिंदी जिले से सामने आया है, जहां 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल भौमिक को उसकी ही दुकान में शटर बंद कर ज़िंदा जला दिया गया.इस दर्दनाक घटना ने पूरे देश में आक्रोश और डर का माहौल पैदा कर दिया है.

चुनावी माहौल में बढ़ती कट्टरता

बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे धार्मिक तनाव भी बढ़ता नजर आ रहा है. हाल के दिनों में कट्टरपंथी बयानों और हिंसक घटनाओं में बढ़त हुआ हैं.
कुछ दिन पहले ही Jamaat-e-Islami से जुड़े एक नेता ने मंच से खुलेआम हिंदू सांसदों को संसद से बाहर करने की धमकी दी थी.इस बयान ने पहले ही देश में माइनॉरिटी के बीच डर का माहौल बना दिया था.

इसी परिवेश में नरसिंदी की यह घटना सामने आई, जिसने हालात को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है .

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना शुक्रवार देर रात की है. जब चंचल भौमिक रोज़ की तरह अपनी छोटी-सी दुकान में सो रहा था.आरोप है कि हमलावर पहले से ही उसपर नज़र टिकाये बैठा था और उसके सोते ही हमलावर ने दुकान का शटर बाहर से बंद कर दिया,और पेट्रोल डालकर दुकान में आग लगा दी.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलावर बाहर खड़ा होकर तब तक देखता रहा, जब तक आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में नहीं ले लिया. चंचल को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला और उसकी मौके पर ही जलकर मौत हो गई.घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया.

परिवार का एकमात्र सहारा था चंचल

चंचल भौमिक अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य था.उसके पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी,मां गंभीर रूप से बीमार हैं और बड़ा भाई दिव्यांग है वहीं,छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है.

परिवार की पूरी जिम्मेदारी चंचल भौमिक के कंधों पर थी.स्थानीय लोगों का कहना है कि वह बेहद सीधा-सादा, मेहनती और मिलनसार युवक था, जिसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी.

परिवार का आरोप है कि यह हत्या एक बनी बनाई साजिस है और इसके पीछे धार्मिक नफरत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

इलाके में फैला दहशत का माहौल

घटना के बाद नरसिंदी और आसपास के इलाकों में डर और आक्रोश का माहौल है.हिंदू समुदाय के लोग सहमे और डरे हुए हैं और कई परिवारों ने अपनी दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है.लोगों का कहना है ,कि अगर ऐसी घटनाएं यूं ही होती रहीं, तो माइनॉरिटी के लिए वहां रहना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएग.

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की दी गई, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कमजोर थी,अल्पसंख्यक इलाकों में पुलिस की पहरेदारी न के बराबर है और पहले भी ऐसी घटनाओं के दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली. यही कारण है कि अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं.

माइनॉरिटी पर हमला : कोई नई बात नहीं

यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया गया हो.बीते वर्षों में कई बार मंदिरों पर हमले हुए ,हिंदू घरों और दुकानों में आग लगा दी गई.महिलाओं के साथ हिंसा और जबरन पलायन जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं.अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी कई बार बांग्लादेश में माइनॉरिटी की स्थिति पर चिंता जताई है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे सवाल

चंचल भौमिक की हत्या के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी बांग्लादेश पर टिकी है.मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है. वही विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बयानबाज़ी नहीं,बल्कि दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और कड़ी सजा औरअल्पसंख्यकों के लिए विशेष सुरक्षा योजना ही अब हालात को सुधार सकती है.

परिवार कर रही इंसाफ की मांग

चंचल के परिवार ने सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों की जल्द गिरफ्तारीऔर कड़ी सजा की मांग की है.परिवार का कहना है ,कि अगर आज चंचल को इंसाफ नहीं मिला, तो कल कोई और इस नफरत का शिकार बन सकता है.

चुनाव और हिंसा का ये खतरनाक मेल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी दौर में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ जाता है और इसका सबसे बड़ा नुकसान अल्पसंख्यकों को उठाना पड़ता है.
नरसिंदी की घटना इस बात का ताजा उदाहरण है कि राजनीति और कट्टरता मिलकर किस तरह आम नागरिकों की जान ले रही है.

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