अस्पताल ले जाते वक्त मौत: तिहाड़ जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
उम्रकैद की सजा: सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगा मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।
पहला मामला: दिल्ली कैंट के पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाने के मामले में उन्हें 2018 में उम्रकैद हुई थी।
दूसरा मामला: सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में फरवरी 2025 में उन्हें फिर उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
एक केस में बरी: जनवरी 2026 में जनकपुरी-विकासपुरी दंगा मामले में कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था।
राजनीति में एंट्री: सज्जन कुमार ने 70 के दशक में दिल्ली नगरपालिका चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा और बाद में कांग्रेस से जुड़े।
लोकसभा सांसद: 1980 में उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ब्रह्मा प्रकाश को हराकर लोकसभा चुनाव जीता था। बाद में 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों ने उनके राजनीतिक जीवन को गहरे विवाद में ला दिया।